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आकाश में फुर्र हो गया विमान का आकर्षण

-निरंजन परिहार

हमारे आसमान से हवाई जहाज गायब हैं। दुनिया भर का आकाश खाली है। लगभग सभी देशों के अनगिनत हवाई उड्डों पर लाखों हवाई जहाज यूं ही पड़े हैं। लॉकडाउन ने सब कुछ लील लिया है। एयरलाइंस की कमाई बंद हैं। तो खर्चे कम करने के लिए वे कर्मचारी कम कर रहे हैं। दुनिया भर की एयरलाइंस में रोजगार खतरे में हैं और कर्मचारी निराश हैं। उम्मीद की कोई किरण भी नहीं दिखाई दे रही। उड्डयन सेक्टर का हाल सचमुच बेहाल हैं।  

 आकाश में उड़ते हवाई जहाजों के आकर्षण से बाहर निकल आइए। क्योंकि अब वहां आकर्षण जैसा कुछ भी नहीं बचा है। कोरोना हमारे सारे आकर्षण हजम करने पर तुला है। किसी को भी, कहीं का नहीं छोड़ा है। क्या आप। क्या हम। और क्या हमारी जिंदगी। खासकर कोरोना हमें वहीं मार रहा है, जिससे हम सबसे ज्यादा आकर्षित होते हैं। फिर भले ही वह हमारा कोई रिश्ता हो, काम हो या हमारा शौक, या फिर हो हमारी हसरतों का सपना। देखिये न, ये हवाई जहाज भी हर किसी को आकर्षित करते हैं। आपको, हमको और सारी दुनिया को। यह कोरोना भी उसी आकर्षण में बंधा हुआ अब हवाई कंपनियों को भी लग गया है। रोग है, तो लगेगा ही। और लग गया है, तो नुकसान निश्चित है। सो, पहले तो कोरोना ने एयरलाइंस के धंधे को धमकाया, महीनों तक माहौल ठप करके सारे विमानों को धरती पर ले आया, कंपनियों को लगभग खड्डे में उतार दिया। ठीक वैसे ही, जैसे आपके और हमारे धंधे को उसने नुकसान पहुंचाया है। अब कोरोना नौकरियां खाने पर उतर आया है। इसीलिए एयर इंडिया तो वैसे भी मुश्किल में हैं, अब इंडिगो एयरलाइंस अपने करीब 2 हजार 500 कर्मचारियों को घर भेजने की तैयारी कर चुकी है। आकाश हवाई जहाजों से खाली है और दुनिया भर के हजारों एयरपोर्ट पर लाखों हवाई जहाज ग्राउंड हुए पड़े हैं।  हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही लॉकडाउन में हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का एलान किया था। वे हर बात सीना ठोककर कहते हैं, सो पैकेज निश्चित रूप से दिया भी होगा। ये तो हम ही शायद अंधे व बहरे हैं, सो कहीं भी उस पैकेज के परिणाम न तो किसी को दिखाई दे रहे हैं और न ही सुनाई दे रहे हैं। सहायता की आहट भी कहीं से भी नहीं आ रही। उल्टे लोगों की नौकरियां जा रही हैं। कंपनियों की भी मजबूरी हैं। वे अपने कर्मचारियों की नौकरियां नहीं खाएंगी, तो खुद क्या खाएंगी। सो, कर्मचारी निकाले जा रहे हैं। फिर कंपनी भले ही हमें कितनी भी लुभावनी लगे, कितनी ही आकर्षित करे और कितनी ही ग्लैमरस लगे, हवाई कंपनियां अपने कर्मचारियों को कम नहीं करें, तो आप ही बताइये क्या करे। इंडिगो एयरलाइंस अपने कुल 23 हजार 531 कर्मचारियों की संख्या में से लगभग 10 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों को घर भेज रही है। सन 2005 में अपनी स्थापना के बाद इंडिगो के इतिहास में इतना दुखद कदम पहली बार उठाया जा रहा है। लेकिन यह कमजोर कथा केवल इंडिगो की ही नहीं है। गो एयर और स्पाइस जेट से लेकर सब की हालत एक जैसी ही है। एयर इंडिया ने भी कमर कस ली है। ऑस्ट्रेलिया की क्वांटास एयरलाइन भी 6 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर रही है, उसके 110 विमान यूं ही खड़े हैं। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के भी करीब एक हजार और हॉगकॉग एयरलाइंस के 400 कर्मचारियों को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। अमरीकन एयरलाइंस भी 25 हजार कर्मचारियों को घर बिठा रही है। दुबई की एमिरेट्स एयरलाइंस ने अपने 1800 पायलट सहित 30 हजार कर्मचारियों को निकाल दिया है। एयर कनाडा को अपने 60 फीसदी कर्मचारियों में कटौती करने जा रही है।मलेशिया एयरलाइंस भी 6 हजार लोगों को निकाल रही है। यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी अपने 13 हजार कर्मचारियों की संभावित छंटनी की चेतावनी दे दी है। हवाई जहाज बनानेवाली कंपनी बोइंग ने 12 हजार से अधिक लोगों की छंटनी का ऐलान किया है। सारे दुखी हैं। निकलनेवाले तो हैं ही, निकालनेवाले भी परेशान हैं। कंपनियां घर बैठे कैसे किसी को तनख्वाह दे। दरअसल,  दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण ने बहुत कुछ बरबाद कर दिया है। अंतर्देशीय और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं पर रोक के चलते उड्डयन उद्योग के पुर्जे ढीले हो गए हैं। उनके लिए अपने खर्चे भी पूरे करना बहुत मुश्किल हो रहा है। इस वजह से देश में प्रत्येक उड्डयन कंपनी ने कॉस्ट कटिंग के अपने अपने तरीके ढूंढ लिए हैं। इन तरीकों में सबसे प्रभावी तरीके है, कर्मचारियों की छंटनी और बिना वेतन के अवकाश पर घर भेजना। सच में, सामान्य जनता को सबसे ज्यादा लुभानेवाले एविएशन सेक्टर की कोरोना ने कमर तोड़कर रख दी है, इसीलिए वह अपने कर्मचारियों को छोड़ रहा है। वैसे भी, कोराना संकटकाल में देश के जो मौजूदा आर्थिक हालात हैं, उसमें बिना बलिदान दिए, या बिना किसी की बलि चढ़ाए आर्थिक संकट से निपट पाना लगभग असंभव सा हो गया है। इस सबमें बहुत तकलीफ तो होती है, लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं है। सो, जो वहां से निकलेंगे, वे कोई नई नौकरी ढूंढेगे। वैसे अब एयरलाइंस में कहीं भी नौकरी मुश्किल है, क्योंकि हालात बहुत खराब है। सो, दिल थोड़ा सख्त कर लीजिए, आनेवाले दिनों में सुशांत सिंह जैसी दुखद खबरें भी आपको सुनने को मिले तो चौंकियेगा मत। उड्डयन सेक्टर चाहे कितना भी लुभावना हो, लेकिन बिना तनख्वाह तो कोई भी काम नहीं करेगा ना। वो, पिछले दिनों जयपुर में सचिन पायलट के संदर्भ में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था ना कि छुरी भले ही सोने की हो, लेकिन उसे कोई पेट में थोड़े ही खाता है।

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Maheka Sansar

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