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पोयणा ग्रामीणों को मनरेगा से आस बनी कोरोना संकट में निराश

यह था मामला मनरेगा कार्य एक माह से बंद,मजदूरी के लिए तरसते
सुमेरपुर । एक रिपोर्ट बताती है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कराने वाली सबसे बड़ी योजना मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को  रोजगार दिया जाता है वही मजदूरी खेतों में काम करने वाले मजदूरों से भी कम है। ऐसे में एक माह से अधिक दिन बीत जाने के बाद भी मनरेगा मजदूर आस लगाये बैठे हैं कि ग्राम पंचायत प्रशासन समय-समय पर उनके हितों को ध्यान में रखकर रोजगार उपलब्ध करेगी।
वर्ष 2005 में आई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का मुख्य लक्ष्य देश के गांवों का विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार देना है। इस योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को प्रतिदिन की मजदूरी और साल में 100 दिन रोजगार की गारंटी दी जाती है, वही कोरोना संकट के दौरान  समय पर रोजगार नहीं मिलने और कम मजदूरी के कारण योजना के तहत काम करने वाले मजदूर निराश हैं।राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर तहसील के पोयणा ग्राम वासियों को लंबे समय से रोजगार नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक माह से अधिक दिन बीत चुके हैं उसके बावजूद भी ग्राम पंचायत की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत मुख्यालय पर स्थित दो जगह पर मनरेगा कार्य शुरू हैं, लेकिन पोयणा गांव में ग्राम पंचायत प्रशासन की अनदेखी के चलते लगभग एक माह से मनरेगा कार्य बंद है। ऐसे संकट कोरोना काल में मजदूरी नहीं मिलना उनके लिए संकट खड़ा हो गया है । ग्रामीणों को समय पर मजदूरी नहीं मिलने से  बहुत परेशान हैं और आर्थिक संकट के साथ  मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यालय पर 100 से अधिक श्रमिक मनरेगा कार्य में काम कर रहे हैं लेकिन पोयणा गांव के श्रमिक लंबे समय से घर बैठे हैं उन्हें दूसरी जगह भी रोजगार नहीं मिल रहा है रोजगार के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में ग्राम वासियों ने ग्राम पंचायत के कर्ता-धर्ताओं पर भेदभाव एवं मनमानी का आरोप लगाया है और रोजगार से वंचित रखने के लिए पंचायत के मुखिया को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों ने कहा कि समय को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्ताव को आगे भेजते तो निश्चित तौर पर कार्य स्वीकृत होता मगर जिम्मेदारों की लापरवाही अनदेखी के कारण लगभग एक माह तक मजदूरी से वंचित रहना पड़ा और कोरोना काल में घर पर  बैठना पड़ा। रोजगार नहीं मिलने के कारण मजदूरी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन दूसरी जगह भी मजदूरी नहीं मिल रही है। ग्राम वासियों ने बताया कि कोरोना के चलते मनरेगा रोजी रोटी का आधार बना था कार्य से मजदूरी पाकर घर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। लेकिन लंबे समय से गांव में नरेगा कार्य बंद है जिससे लोगों के आगे संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने कहा कि ग्राम पंचायत के कर्ता-धर्ताओ ने आज-कल, आज-कल करके एक माह से अधिक दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज दिन तक रोजगार नहीं मिला है। रोजगार नहीं मिलने से ग्राम पंचायत के प्रति ग्रामीणों में आशा की किरणें के बदले अब निराशा जाग उठी हैं।

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