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अब सब्जियाें से नहीं रहेगा बीमारी का खतरा, सेहतमंद रखेगा हर्बल कीटनाशक

फूल के पैराथ्रिन तत्व से हर्बल कीटनाशक स्प्रे तैयार किया गया है। इसका शुक्लागंज और सनिगवां समेत शहर में अन्य स्थानों पर परीक्षण भी सफल रहा है। अब सीएसए के शाकभाजी केंद्र में क्लीनिकल परीक्षण के लिए भेजने के बाद पेटेंट कराने की तैयारी है।

कानपुर, [विक्सन सिक्रोडिय़ा]। प्रकृति में परिवर्तन के साथ शाक-भाजी पर भी कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। ऐसे में सब्जियों की फसल को कीटों से बचाने के लिए प्रयोग किया जाने वाले रसायन से सेहत को खतरा बना है। अब इस खतरे कम करने के लिए हर्बल कीटनाशक आ गया है। इससे न सिर्फ सब्जियों को कीटों से बचाया जा सकेगा बल्कि सब्जी का सेवन करने वाले को कीटनाशक के प्रभाव से होने वाली बीमारियों से भी बचाएगा।सीएसए विश्वविद्यालय के शाकभाजी केंद्र में क्लीनिकल परीक्षण के लिए भेजने के साथ ही पेटेंट कराने की भी तैयारी है।

रासायनिक कीटनाशक से क्या होते खतरे

आलू, बैगन, लौकी, टमाटर, तरोई व मटर आदि सब्जियों का सेवन रोजाना लोग करते हैं। प्रकृति परिवर्तन के साथ सब्जियों में कीटों का खतरा बढ़ा तो तरह तरह के रसायन का प्रयोग शुरू हो गया। किसान फसल को बचाने के लिए तैयार फसल में सब्जियों के ऊपर रसायनिक कीटनाशक का छिड़काव करते हैं। इस रसायन का प्रभाव काफी समय तक बना रहता है। ये रसायन सब्जी की ऊपरी परत पर बने रहते हैं, वो तब भी साफ नहीं होते जब सब्जी काटने और पकाने से पहले उन्हें पानी से अच्छे से धुल भी लिया जाए। ये रसायन सब्जी के साथ शरीर में जाकर तरह-तरह की बीमारी पैदा कर सकते हैं। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।

पीपीएन कॉलेज के प्रोफेसर ने तैयार किया हर्बल कीटनाशक

अबतक किसानों को हर वक्त आलू, बैगन, लौकी, टमाटर, तरोई व मटर समेत अन्य सब्जियों में कीटों के हमले की चिंता सताती है। कई बार ये कीट काफी फसल चट कर जाते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पीपीएन डिग्री कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव व रुहेलखंड विवि के एसएल इंस्टीट्यूट, मुरादाबाद के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मिश्रा ने गुलदाउदी के फूलों से ऐसा हर्बल स्प्रे बनाया है, जो कीटों का 100 फीसद सफाया करने में सक्षम है। शुक्लागंज व सनिगवां समेत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के फॉर्म हाउसों व खेतों में इसका परीक्षण सफल रहा है।

गुलदाउदी के कवच से हरी-भरी रहेंगी सब्जियां

अब चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्यो गुलदाउदी के फूल में पैराथ्रिन पाया जाता है। इसी से यह स्प्रे तैयार किया गया है। पैराथ्रिन की खासियत यह होती है कि कीटों के नर्वस सिस्टम को खराब कर देता है जिससे वह पनप नहीं पाते हैं। फूलों से बनने वाले इस कीटनाशक की खासियत यह है कि हर्बल होने के कारण सब्जियों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। केमिकल का छिड़काव करने के बाद सब्जी तो कीटों से बच जाती हैं, लेकिन केमिकल के कारण वह मानव शरीर के लिए हानिकारक होती है।

ऐसे तैयार हुआ स्प्रे

डॉ. सौरभ ने बताया कि 50 ग्राम गुलदाउदी के फूलों को एक दिन सुखाया गया। उसके बाद 350 मिली डिस्टिल्ड वाटर मेंं 20 मिनट तक फूल उबाले गए। ठंडा होने पर उन्हें छान लिया गया। छने हुए पानी से 40 मिली पानी लेकर स्प्रे बोतल में भरा गया। इस पानी में पैराथ्रिन का अर्क आ जाता है। उसे पौधे की पत्तियों, फूलों-जड़ों में डालकर तीन दिन तक परीक्षण किया गया और सकारात्मक नतीजे मिले।

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