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भीलवाड़ा में मुस्लिम समुदाय का निर्णय, ढोल, गाने व बाजे बजे तो मौलाना नहीं पढ़ायेंगे निकाह, शादी होगी केंसल

भीलवाड़ा। मदीना मस्जिद, मोहम्मदी काॅलोनी, शास्त्रीनगर में एक मीटिंग मदीना मस्जिद कमेटी की अध्यक्ष हाजी अब्दुल गफूर, सैक्रेट्री हाजी रूस्तम अली शेख व कोषाध्यक्ष मोहम्मद शरीफ पठान की अध्यक्षता में हुई। जिसका संचालन साकिब रज़ा अज़हरी पेश इमाम मदीना मस्जिद व नायब इमाम अख्तर रज़ा साहब ने की। जिसमें अब्दुल हमीद मंसूरी, हाजी रशीद मोहम्मद मंसूरी, हाजी याकुब शेख, उस्मान सिलावट, हाजी तनवीर पठान, शरीफ नीलगर, मो. असलम गौरी, अ. लतीफ, मोहम्मद शेख, बशीर मंसूरी, सलीम हम्माल, फजले रऊफ, मकसूद मंसूरी, रशीद पेन्टर, सलीम मंसूरी, अनीस मुल्तानी व तमाम मुकतदी व काॅलोनी के मौतबीरान भी मौजूद थे।
मीटिंग में धर्मगुरू साकिब रज़ा अजहरी ने बताया कि समाज में हो रहे फिजूल खर्च को रोकने के लिए सख्त कदम उठाये जाने की जरूरत है। फिजूल खर्च से समाज पिछडे़पन का शिकार हो रहा है, अगर समाज मजबूत नहीं होगा तो समाज तरक्की नही कर सकता। आजकल शादी समारोह में लोग फिजूल खर्च को बढ़ावा देते हुए डी.जे., ढोल व गाने बाजे को महत्व देते हैं जिससे बेहयाई फैलती है।
इसी क्रम में उन्होंने बताया इमाम साहेबान व मस्जिद कमेटी मेम्बर और अवाम ने कौम की फिक्र करते हुए सख्ती से फैसला लेते हुए सबसे पहले शादी समारोह हो या कोई मौका उसमें डी.जे., ढोल, गाने-बाजे नहीं बजाये जायेंगें। इस पर पूर्णतया रोक रहेगी। यदि इस फैसले के बाद भी कोई गैर शरई काम करता पाया गया तो इमाम साहब व नायब इमाम निकाह नहीं पढ़ायेंगे।

जोधपुर में भी हुई थी शुरुआत

जिस तरह आज ये पहल भीलवाड़ा मे हुई है ठीक उसी तरह कुछ वर्षों पहले जोधपुर में भी ये शुरुआत हुई थी लेकिन कुछ समय बाद इसका विरोध शुरू हो गया था यहां तक की कई शादी करने वालो ने निकाह कराने वाले मौलाना और काजी को धमकी तक दे डाली और कई तरह के विवादों के बाद आखिरकार ये फार्मूला ज्यादा समय तक नहीं चल पाया था अब देखना है कि भीलवाड़ा के मुस्लिम इसे कब तक मानते है।

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Maheka Sansar

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