मरीज के परिजनों ने लगाया था इलाज में लापरवाही का आरोप
जालोर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जालोर के पीठासीन अधिकारी धनश्याम यादव ने वसुंधरा हास्पीटल जोधपुर के चिकित्सा लापरवाही से एक महिला की मौत होने पर पन्द्रह लाख रूपये का मुआवजा देने एवं इलाज मे खर्च 51662 रूपये अदा करने का आदेश दिया।
परिवादी जोयब खान पुत्र सरफराज खान निवासी जालोर ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपनी माता के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उसकी माता जोधपुर मे रहती थी, उस दौरान उसकी माता को मई 2022 में पेट दर्द की शिकायत पर वसुंधरा हास्पिटल जोधपुर ले जाया गया, जहां पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) की पथरी का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान और बाद में उचित चिकित्सा प्रबंधन नहीं किया गया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ती गई। बाद में जांच में गंभीर त्रुटियां सामने आईं और लगातार बिगड़ती हालत के बीच 14 जून 2022 को उसकी माता की मृत्यु हो गई। परिवादी ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही बताया। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अस्पताल प्रबंधन व संबंधित डॉक्टरों को दोषी मानते हुए आदेश जारी किया।
आयोग के अध्यक्ष धनश्याम यादव व सदस्य निरंजन शर्मा ने आदेश दिया कि अस्पताल व संबंधित चिकित्सकों की लापरवाही से मरीज की मौत हुई इसलिए वसुंधरा हास्पीटल जोधपुर परिवादी को मानसिक व शारीरिक क्षति के लिए 15 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए गए। वहीं इलाज में खर्च हुई राशि 51,662 रुपये भी लौटाने का आदेश के साथ परिवाद व्यय के रूप में अतिरिक्त दस हजार रुपये देने का आदेश दिया। सभी राशि 45 दिन के भीतर अदा करने के निर्देश, अन्यथा नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
आयोग ने स्पष्ट माना कि मामले में चिकित्सा लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) हुई है, जिसके चलते यह निर्णय दिया गया। यह फैसला चिकित्सा सेवाओं की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।