जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी गेट बंद करने के आदेश से छात्र नाराज हैं और उन्हें आवाज दबाए जाने का आरोप लगा रहे हैं।
छात्र संघ की मांग और प्रदर्शन की रणनीति
छात्रों ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं – छात्र संघ को पुनः बहाल किया जाए, प्रदर्शनकारियों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और प्रॉक्टर इस्तीफा दें। प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने बताया कि वे पिछले 14-15 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और भूख हड़ताल पर भी हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे और कैंपस छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासन के आदेशों से प्रभावित हो रही पढ़ाई
छात्रों का कहना है कि प्रशासन के गेट बंद करने के फैसले से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई छात्र आसपास के इलाकों में रहते हैं और रात 2 बजे तक खुलने वाली इब्न सीना लाइब्रेरी में पढ़ाई करते हैं। छात्र बताते हैं कि एक कमरे में कई छात्र एक साथ रहते हैं, इसलिए लाइब्रेरी ही उनकी मुख्य पढ़ाई का स्थान है। गेट बंद होने से वे लाइब्रेरी नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।
प्रशासन पर आंदोलन दबाने का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन आंदोलन को हिंसक तरीके से दबाने की कोशिश कर रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटाया जा रहा है और प्रदर्शन स्थल को खाली कराने की कोशिशें हो रही हैं। एक छात्र ने कहा कि प्रशासन डरा हुआ है और कई पुलिसकर्मी व सिक्योरिटी गार्ड बुलाकर उन्हें हटाने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद छात्र डटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।
विरोध प्रदर्शन के बीच तनाव का माहौल
छात्रों ने बताया कि प्रशासन के गेट बंद करने के फैसले से न सिर्फ उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि इससे कैंपस में तनाव भी बढ़ा है। छात्र संघ बहाली की मांग पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें शांतिपूर्ण हैं और वे केवल अपना अधिकार चाहते हैं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे रीडिंग हॉल में पढ़ाई के लिए आते हैं क्योंकि साझा कमरों में पढ़ाई करना मुश्किल होता है। ऑनलाइन कक्षाएं होने के कारण भी वे विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ाई करना चाहते हैं। छात्रों ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी मांगों को सुने और गेट बंद करने का निर्णय वापस लिया जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।