कासम खान ने कांग्रेस से टिकट की मांग की थी लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें नकारते हुए टिकट नहीं दिया, कासम खान ने इसे चुनौती के रूप में लिया और शानदार जीत दर्ज की, आज वही कांग्रेस के नेता बोर्ड बनाने के लिए समर्थन के लिए इनके हाथ जोड़े पीछे घूम रहे हैं।
जोधपुर। नगर निगम चुनाव-2026 में वार्ड संख्या 27 से निर्दलीय प्रत्याशी कासम खान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 960 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। उनकी यह जीत न सिर्फ कासम खान की सफलता है, बल्कि जनता के भरोसे, मजबूत संगठन और जमीनी पकड़ की मिसाल भी मानी जा रही है।
निर्दलीय के रूप जीतकर दिया बड़ा संदेश, दिखाया दम
कासम खान ने बिना किसी बड़े दल के समर्थन के चुनाव लड़कर यह साबित किया कि जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत होती है और इसके लिए किसी पार्टी की जरूरत नहीं होती लोकतंत्र में जनता माईबाप है और जनता जिसे चाहे सर पर बैठा सकती है इसके लिए किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती ऐसे में कासम ने ये साबित किया कि जनता के दिलो में राज करने वालों को जनता खुद साथ मिलकर जीत दिलवाती है।
कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो खुद बनाई राह
उन्होंने पहले कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का साहसिक फैसला लिया और जबरदस्त रणनीति बनाई और मजबूती से चुनाव जीता। कासम खान ने कांग्रेस के प्रत्याशी सुल्तान खान को 960 वोटों के अंतर से हराकर अपनी मजबूत स्थिति का परिचय दिया।
मजबूत चुनावी मैनेजमेंट, जोशीले कार्यकर्ताओं की मेहनत
चुनाव के दौरान कासम खान की टीम ने बेहद सुनियोजित रणनीति अपनाई, बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाई और हर मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित की। उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जिसने चुनावी माहौल को पूरी तरह उनके पक्ष में मोड़ दिया।
परिवार, दोस्तों और क्षेत्र के लोगों का अहम योगदान:
इस जीत में उनके पिताजी जेफू खान, लतीफ खान और अब्बास खान की टीम की दिन-रात की मेहनत और रणनीतिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहा। सभी ने टीम बनाकर जबरदस्त मेनेजमेंट किया और ये बताया कि हम राजनीति में नए नहीं है और क्षेत्र की जनता के भरोसे मैदान में उतरकर जीत दर्ज की।
रात दिन जनसंपर्क बना जीत की कुंजी
घर-घर संपर्क, व्यक्तिगत जुड़ाव और आम जनता की समस्याओं को समझकर समाधान देने की उनकी शैली ने उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग बनाया। कासम खान को हर वर्ग—युवा, बुजुर्ग और व्यापारियों का व्यापक समर्थन मिला, जिसने जीत को आसान बनाया। हालाकि चुनाव में प्रचार का समय कम मिला था लेकिन इतने कम समय में इन्होंने रात दिन मेहनत की। दिन में आम लोगों से निजी तरीके से मिलना, बुजुर्ग, महिलाओं और युवाओं की अलग अलग टीम बनाई, शाम के समय रोजाना 5 से 7 सभाएं की लोगो को अपना उद्देश्य बताया।
कासम खान की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही
उनकी इस जीत को शहर की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, बताया जा रहा है कि पूर्व महापौर कुंती देवड़ा के साथ इनके परिवार के सदस्यों के साथ हुई अनबन के कारण इनका टिकट काटा गया था जिससे पूर्व जेडीए चेयरमैन राजेंद्र सोलंकी और कुंती देवड़ा ने इनके टिकट का विरोध किया था और इस कारण से इनको टिकट नहीं मिला था लेकिन कासम खान ने चुनाव जीतकर सबके मुंह पर ताला लगा दिया।
समर्थकों और वार्डवासियों में जश्न का माहौल:
जीत के बाद पूरे वार्ड में जश्न का माहौल रहा, समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और आतिशबाजी कर खुशी जाहिर की। कासम खान ने जीत के बाद कहा कि वे वार्ड की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से कार्य करेंगे।
कुल मिलाकर, कासम खान की यह जीत यह दर्शाती है कि यदि नेतृत्व मजबूत हो, टीम समर्पित हो और जनता का भरोसा साथ हो, तो निर्दलीय होकर भी बड़ी जीत हासिल की जा सकती है।
