हनुमान चौहान केरू करते है चमत्कार, हजारों लोगो को किया ठीक - Maheka Sansar

हनुमान चौहान केरू करते है चमत्कार, हजारों लोगो को किया ठीक

Hanuman chouhan keru

जोधपुर। एक शख्स ऐसा , जो इस सबसे 10 या 15 मिनिट में बगैर कोई दवा, बगैर कोई इन्जेक्शन, बगैर कोई ऑपरेशन के निजात दिला दें। मुर्झाये, उदास चेहरे पर आराम की मुस्कान लोटा दे जिसे देखने के लिए न जाने कबसे तरस रहे हों।

कमर में, घुटनों में, हाथों में, पांवों में, जोड़ों में कहीं भी असहनीय दर्द है, अस्थमा हैं, एक भी सांस चैन से नहीं ली जाती, गठिया है या पथरी, शुगर है या बवासीर जब पीड़ा होती है तो छटपटा जाते हैं। न जाने

कितने कैप्सूल, कितनी ही गोलियां निगली, इंजेक्शन लगवाये, पर हालात, तड़पन, घबराहट, बदहवाशी में कोई फर्क नहीं पड़ता, पर एक शख्स ऐसा भी, जो इस सबसे 10 या 15 मिनिट में बगैर कोई दवा, बगैर कोई इन्जेक्शन, बगैर कोई ऑपरेशन के निजात दिला दें। मुर्झाये, उदास चेहरे पर आराम की मुस्कान लोटा दे जिसे देखने के लिए न जाने कबसे तरस रहे हों। लगे ऐसा कि जैसे कुछ भी हुआ हों। आराम से चलिए, बगैर रूकावट ठंडी सांसे लीजिए, थपथपाकर देखिए, कहां गया दर्द ? कहाँ गई बैचेनी ? कहां गये वे दिन- वे रातें जब चैन से दो पल नहीं बैठ पाते थे, न रातों को सकून की नींद है। नसीब हो पाती थी। अब मुस्कराहट वांटिये, खुद हंसिये औरों को भी हंसाईये। जीवन के लिए स्वस्थ तंदुरस्ती के लिए यह उपहार देने में समर्थ रूप से जो नाम जो शख्स एक चमत्कार के रूप में जाना जा रहा है वह है हनुमान चौहान।

केरू निवासी हनुमान चौहान न डॉक्टर न सर्जन न कोई महात्मा है न कोई बाबा बल्कि स्मार्ट, पेन्ट – शर्ट पहने सिर पर कंगी से बालों को संवारे, आकर्षक व्यक्तित्व के रूप में देखेंगे। जहां दर्द वहां इनके हाथों का

बबीता फोगट कजाकिस्तान में आयोजित कुश्ती FILA एशियाई ओलंपिक योग्यता टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही। और उनके हाथों से सम्मानित होना का मौका मिला

सहलाता सा हल्का स्पर्श, अतिमदम स्वर में न कोई मंत्र का जाप एक बार दो बार ऐसे ही स्पर्श के बाद कहां दर्द ? कैसा दर्द, कहां गया, कैसे गायब हुआ यह वही जाने, आप तो उटिये, देखिए कि ऐसा आराम कि जिसकी कल्पना भी नहीं की होगी। स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा भी चमत्कार हो सकता है।

हनुमान चौहान के सान्निध्य में आकर दुबई से लेकर भारत के लगभग सभी शहरों में करीब 10 हजार लोग रोग मुक्त होने की खुशी हासिल कर चुके हैं। आश्चर्य तो यह कि यह सब न कोई फेस, न कोई खर्च, न एक रूपया तक दिये ही उपलब्ध होती है। आप अपना पर्स अपने पास रखिए उसे खोलने, रूपये निकालने की जरूरत कहां हैं? हां, यदि अति आवश्यक है तो घर में तेल लगाने, जोड़ को जुड़े रखने के लिए कुछ दवा, तेल लेने में उसकी लागत मात्र ही देना हो सकती है। इस समय इनका आरटीओ ऑफिस जोधपुर के पास मिलना सम्भव है।