भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का पैसा निकालना जारी है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में अब तक एफपीआई भारतीय शेयरों से 52,100 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इससे पहले सितंबर में उन्होंने 35,861 करोड़ रुपये और जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये की निकासी की थी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर ऊंचे प्रतिफल, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल के ऊंचे दाम विदेशी निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। चॉइस वेल्थ के धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में महंगाई ऊंची रहने से ब्याज दर बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे वहां की परिसंपत्तियां निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लग रही हैं।
हालांकि 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ खरीदारी भी की। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार के अनुसार, अमेरिका में 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के 5.3 प्रतिशत से घटकर 5.08 प्रतिशत पर आने और रुपये की मजबूती से यह अस्थायी बदलाव आया। बजाज ब्रोकिंग के पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक बिकवाली की रफ्तार घटना बाजार धारणा स्थिर होने का संकेत हो सकता है।
इसके बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की रिकवरी के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। बॉन्ड बाजार में भी सितंबर के दौरान मिला-जुला रुझान रहा, जहां कुछ मार्गों से निकासी हुई तो सामान्य मार्ग से 3,387 करोड़ रुपये का निवेश भी दर्ज किया गया।
स्रोत: टीवी9 भारतवर्ष


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।