दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दूसरे राज्यों से पढ़ने आने वाले छात्रों को सस्ता आवास देने के लिए खाली पड़े स्टाफ क्वार्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों के लिए रहने की जगह की कमी दूर करने के उद्देश्य से गठित आठ सदस्यीय समिति ने इसकी सिफारिश की है।
समिति ने रीड्स लाइन और ढाका परिसर में खाली पड़े क्वार्टरों का नवीनीकरण कर उन्हें छात्रों को देने का सुझाव दिया है। इनमें टाइप-1 क्वार्टर शामिल हैं, जिनमें एक कमरा, रसोई और बाथरूम की सुविधा है। छात्र इनमें साझा व्यवस्था के तहत रह सकेंगे। विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग को दूसरे परिसरों में खाली पड़े क्वार्टरों का सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विश्वविद्यालय मौजूदा छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। जहां संभव होगा, वहां एक कमरे में दो छात्रों को ठहराया जा सकता है। इसके साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिससे पता चल सकेगा कि कौन छात्र परिवार के साथ रहता है और कौन पीजी में। इससे पीजी में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा में भी मदद मिलेगी।
समिति ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों की सरकारों से संपर्क कर उनके छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया है। हालांकि नए छात्रावासों का निर्माण सरकारी मंजूरी और बजट पर निर्भर करेगा। माना जा रहा है कि इन कदमों से राजधानी में महंगे किराये और पीजी पर निर्भर बाहरी छात्रों को राहत मिलेगी।
स्रोत: अमर उजाला


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