अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी विवाद के बीच क्यूबा को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि ईरान से सैन्य अभियान खत्म कर लौटते वक्त अमेरिकी युद्धपोत क्यूबा के तट के पास रुक सकते हैं। इस बयान से अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि तेहरान समझौता करने में विफल रहता है तो अमेरिकी सेना फिर से हमला कर सकती है।
क्यूबा के तट पर युद्धपोत भेजने की चेतावनी
फ्लोरिडा में चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान से लौटते समय अमेरिका अपने युद्धपोतों में से एक को क्यूबा के तट से करीब 50 गज की दूरी पर रोक सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में क्यूबा के लोग हाथ ऊपर कर देंगे और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वहां भेजा जाएगा। ट्रंप के इस बयान पर क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अमेरिका की धमकियों को क्यूबा खारिज करता है। रोड्रिग्ज ने क्यूबा के समुद्र तटों और वहां की नुकीली चूना पत्थर की चट्टानों का भी उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद हैं, इसलिए ट्रंप की यह टिप्पणी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईरान पर फिर हमला संभव
ट्रंप ने कहा है कि यदि तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने में असफल रहता है तो अमेरिकी सेना दोबारा हमला कर सकती है। उन्होंने बताया कि अमेरिका का सैन्य अभियान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन उनके अनुसार, यह कीमत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उचित है। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख बनाए हुए है। आगे की कार्रवाई बातचीत पर निर्भर करेगी।
अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम
ईरान से जुड़े सुरक्षा खतरे को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने क्षेत्र के चार अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला किया है। यह कदम ईरान की कथित उन कोशिशों के कारण उठाया गया है, जिनमें अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाया जा सकता है। सैन्य तनाव के इस दौर में अमेरिकी कर्मियों और दूतावासों की सुरक्षा वाशिंगटन के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूरा नियंत्रण है। ईरानी पक्ष के अनुसार, उनके नियमों के तहत इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। हाल ही में ईरानी नौसेना ने कहा कि कच्चे तेल से लदे दो सुपरटैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। इन जहाजों में लगभग 45 लाख बैरल कच्चा तेल था। ईरान के मुताबिक, ये जहाज बिना अनुमति वाले दक्षिणी मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश नहीं करने की चेतावनी भी दी है और अमेरिकी दावों को चुनौती दी है कि उसकी सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सैन्य तनाव या आवाजाही में बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप के बयान, ईरान की चेतावनियों और क्षेत्रीय विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ेगी या संघर्ष और बढ़ेगा।


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