शराब विक्रेताओं को अब फूड लाइसेंस लेना जरूरी, साथ ही मिलावट करने वालों पर अब 10 लाख की पेनल्टी

मिलावट के खिलाफ अभियान जारी रहेगा, 1 जुलाई से चलेगा अभियान, शराब की दुकानें होगी चेक

जयपुर। शराब विक्रेताओं को भी फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के इस आदेश से शराब कारोबारीयो में हलचल मची हुई है उधर विभाग ने 1 जुलाई से सैंपलिंग के लिए सघन अभियान चलाने की तैयारी कर ली है।

बीकानेर जिले में शराब के कुल 226 ठेके हैं लेकिन वर्तमान में 140 दुकाने ही चल रही है 12 जून को नया टेंडर होने वाला है आबकारी विभाग की नीतियों को कारण नई दुकान लेने में रुचि नहीं दिख रहे हैं इसके अलावा रात 8bबजे के बाद बिक्री पर सख्ती के कारण भी शराब ठेकेदारों का रुझान कम हुआ है। इसके चलते फूड लाइसेंस की अनिवार्यता का आदेश शराब कारोबारियो के लिए और मुसीबत बढ़ाने वाला है खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने प्रदेश भर के आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि शराब कारोबारी को खाद्य अनुज्ञा पत्र लेने के लिए पाबंद किया जाए दरअसल फूड सेफ्टी एक्ट 2006 के अनुसार सभी खाद्य कारोबारीयो को अपने वार्षिक टर्नओवर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के अनुसार खाद्य लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है। लाइसेंस शुल्क 2 हजार तय किया गया है। अल्कोहल बेवरेज का खाद्य कारोबार करने वाले विक्रेता निर्माता भंडारण करता है और परिवहनकर्ता लाइसेंस के लिए ई-मित्र के माध्यम से फोर्स वेबसाइट पर आवेदन कर सकतें है । 2012 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने भी इसे लागू कर दिया था लेकिन किसी विक्रेता ने इसमें रुचि नहीं दिखाई और लाइसेंस नहीं लिया राज्य सरकार अब इस नियम को सख्ती से लागू करवाने जा रही है।

10 लाख की जुर्माने की राशि

जो शराब दुकानदार फूड लाइसेंस नहीं लेता है उसके खिलाफ एफएसएसआई 2006 एक्ट की धारा 63 के तहत प्रकरण बनाया जाता है इस धारा में दोषी पाए जाने पर जुर्माने का प्रावधान है पूर्व में 5 लाख जुर्माना और 6 महीने की सजा का प्रावधान था जिसमें संशोधन कर दिया गया है। अब इसको बढ़ाकर 10 लाख कर दिया गया है।

शराब व्यापारियों ने इस फैसले का किया कड़ा विरोध

एक शराब व्यापारी ने विरोध जताते हुए कहा कि हम सरकार से ही शराब खरीद कर बेच रहे हैं इससे इंस्पेक्टर राज हावी हो जाएगा उन्होंने फूड लाइसेंस की अनिवार्यता को गलत करार देते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले आबकारी एक्ट में संशोधन करना होगा सरकार ही ये तय कर दे की फूड लाइसेंस के बिना बीड में शामिल नहीं हो सकेंगे यह नियम केवल निर्माता पर लागू होना चाहिए हम सरकार से ही खरीद कर बेचते हैं इसमें इंस्पेक्टर राज हावी होगा सरकार के उपक्रम भी आरएसवीसीएल के पास भी फूड लाइसेंस नहीं है जहां से विक्रेता को शराब बेची जाती है शराब व्यापारी का कहना है कि सरकार की नीतियों के कारण ठेके ही नहीं उठ रहे हैं ठेकेदार गारंटी भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं रात 8 बजे बाद ब्रेक लगाने से 30% बिक्री कम हुई है इसका राजस्व भी सरकार को ही मिल रहा था।

प्रति शराब की दुकान दो हजार होगी फीस

फूड सेफ्टी एक्ट के तहत शराब विक्रेताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य है लेकिन इस नियम को विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया है केवल आबकारी विभाग से दुकानों की सूची मांग कर इतिश्री कर ली थी लाइसेंस फीस दो हजार प्रति दुकान तय किया गया है शराब की दुकानों में फूड लाइसेंस लेने के बाद सरकार को 1 करोड़ 53 लाख का सलाना लाभ होगा प्रदेश में शराब की 7665 दुकान हैं फूड लाइसेंस फीस 2 हजारके हिसाब से 1 साल में सरकार को 1 करोड़ 53 लाख रूपए राजसव मिलेगा शराब कारोबारी के पास लाइसेंस नहीं होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था।