लोक अभियोजक ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस प्रकार के कड़े फैसलों से मिलावटखोरों में भय उत्पन्न होगा
धौलपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय ने खाद्य मिलावट के एक गंभीर मामले में बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 लाख रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया है। आरोपियों ने रसायनों और रिफाइंड तेल मिलाकर नकली दूध तैयार किया था।
14 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश, 9 को सजा
लोक अभियोजक भगवान सिंह नारोलिया ने बताया कि 28 फरवरी, 2015 को थाना सदर में तत्कालीन थाना प्रभारी विजय सिंह ने मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान सामने आया कि अजीत ढाबे के पीछे स्थित श्रीजी डेयरी पर टेंकरों में केमिकल फॉर्मेलिन और रिफाइंड तेल का उपयोग कर अवैध रूप से नकली दूध तैयार किया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर उपकरणों सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने प्रकरण में कुल 14 आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई, जबकि न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में 4 आरोपियों को बरी कर दिया।
दूध में फॉर्मेलिन जैसे रसायनों का उपयोग घातक
जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मांगो ने विस्तृत सुनवाई के बाद 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि दूध में फॉर्मेलिन जैसे रसायनों का उपयोग अत्यंत घातक है, जो मानव शरीर के लिए धीमा जहर साबित होता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपियों द्वारा दूध में केमिकल एवं लिक्विड डिटर्जेंट मिलाकर न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।
इन 9 व्यक्तियों को मिली सजा
अदालत ने इस कृत्य को केवल खाद्य सुरक्षा का उल्लंघन नहीं मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 328 के तहत जहरीला पदार्थ देने की श्रेणी में भी माना। लोक अभियोजक ने कहा कि इस प्रकार के कड़े फैसलों से मिलावटखोरों में भय उत्पन्न होगा और आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. लोक अभियोजक ने बताया कि न्यायाधीश संजीव मांगो ने मिलावट के आरोपी संजय चौहान, वृंदावन, बैजनाथ, शिशुपाल, प्रमोद, जसवंत, भूरी सिंह, जितेंद्र और रामवीर को सजा एवं आर्थिक तौर पर दंडित किया है।