मसालों में कृत्रिम रंग और ईंट का चूरा मिलने की पुष्टि, 17 मिलावटखोरों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल; 48 मामलों में 3.85 लाख रुपये का जुर्माना
चंदौली। त्योहारों के बीच जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में मिलावटखोरी का मामला सामने आया है। पिछले छह माह में जांच के लिए भेजे गए खाद्य पदार्थों के नमूनों में से 26 मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में खोवा और पनीर सहित कुछ खाद्य पदार्थों में यूरिया समेत अन्य रासायनिक पदार्थों की मिलावट पाई गई, जबकि मसालों में कृत्रिम रंग और ईंट का चूरा मिलाए जाने की पुष्टि हुई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मिलावट के मामलों में 17 आरोपियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया है।
59 नमूनों की रिपोर्ट मिली, 26 फेल
विभाग की ओर से पिछले छह माह में कुल 97 खाद्य नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनमें से 59 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, 33 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 26 नमूने फेल रहे। इनमें 23 नमूने अधोमानक और तीन नमूने खाद्य सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित पाए गए।
दाल, अनाज और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ भी जांच के दायरे में
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में दालों में कृत्रिम रंग, दूसरे प्रकार के दाने और कंकड़-पत्थर जैसी मिलावट की पड़ताल की जाती है। वहीं, अनाज में मिट्टी, भूसी और अन्य बाहरी पदार्थों की मौजूदगी की जांच होती है। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में निर्धारित मानकों से अधिक रंग, संरक्षक और अन्य अवांछित तत्वों की भी जांच की जाती है।
48 मामलों में 3.85 लाख रुपये का जुर्माना
सहायक आयुक्त खाद्य धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से मसालों, मिठाइयों, पनीर, खोया, दाल-अनाज तथा पैक और बोतलबंद पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गई है। मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।
उन्होंने बताया कि अब तक 48 मामलों में एडीएम न्यायालय की ओर से कुल 3.85 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। प्रयोगशाला से शेष नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।