जांच में अमूल दूध के सेंपल फैल, 48 प्रतिशत नमूने मानक से बाहर

सोनभद्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जहां अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच लिए गए 48% खाद्य नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए

सोनभद्र। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की सख्ती के बावजूद मिलावटखोरी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभाग की टीम की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस दौरान लिए गए नमूनों में से करीब 48 प्रतिशत मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। सबसे अहम मामला चर्चित डेयरी ब्रांड अमूल (गोल्ड छाप) के दूध का सामने आया, जिसका सैंपल जांच में फेल मिला। इस पर अपर जिलाधिकारी न्यायालय की ओर से संबंधित पक्ष पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 2,061 निरीक्षण किए गए, जबकि शिकायत मिलने पर 198 स्थानों पर औचक छापेमारी की गई। टीम ने इस दौरान कुल 208 नमूने संग्रहित किए। जिनमें से 231 जांच रिपोर्ट अब तक प्राप्त हुई, कुछ रिपोर्ट पुराने भी इसमें शामिल हैं। इनमें केवल 99 नमूने ही मानक के अनुरूप पाए गए। सात नमूने असुरक्षित श्रेणी में मिले, जबकि छह में नियमों का उल्लंघन पाया गया। कुल मिलाकर 112 नमूने फेल हो गए जो कुल रिपोर्ट का 48 प्रतिशत है। जांच के दौरान सरसों के तेल और दुकानों पर बिक रही मिठाइयों में भी मिलावट के मामले सामने आए हैं।

79 मामले कोर्ट में दर्ज, 20 लाख जुर्माना

वित्तीय वर्ष 2025-26 में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटखोरी व मानक उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। इस दौरान एडीएम कोर्ट में 79 मामलों में अभियोजन दर्ज किए गए, जबकि सात मामले न्यायिक न्यायालय में भेजे गए। विभाग द्वारा एडीएम कोर्ट में 59 मामलों का निस्तारण भी किया गया।

इन मामलों में दोषी पाए गए संबंधित पक्षों पर कुल 20 लाख एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। विभाग की इस कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मचा है और नियमों के पालन को लेकर सख्ती का संदेश गया है।