कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के 5 वर्षीय अर्जुन विशाल प्रजापति ने 141 IQ स्कोर के साथ Mensa और Intertel की सदस्यता पाई और ओंटारियो विधानसभा में सम्मानित किए गए हैं।
ओंटारियो विधानसभा में अर्जुन का सम्मान
कनाडा के ओंटारियो में रहने वाले 5 वर्षीय अर्जुन विशाल प्रजापति को उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता के लिए ओंटारियो की लेजिस्लेटिव असेंबली में सम्मानित किया गया। गुजरात के वडोदरा से जुड़े अर्जुन को प्रोविंशियल पार्लियामेंट की सदस्य मैरी-मार्गरेट मैकमोहन ने सर्टिफिकेट ऑफ रिकग्निशन एंड अचीवमेंट प्रदान किया।
अर्जुन के परिवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी बधाई पत्र भेजे हैं।
अर्जुन की IQ स्कोर और मेंबरशिप
अर्जुन ने स्टैनफोर्ड-बिनेट इंटेलिजेंस स्केल (SB5) के तहत निम्नलिखित स्कोर हासिल किए हैं:
- फुल स्केल IQ: 141 (99.7वां पर्सेंटाइल)
- नॉनवर्बल IQ: 149 (99.9वें पर्सेंटाइल पर या उससे ऊपर)
- फ्लूइड रीजनिंग: 144 (99.8वां पर्सेंटाइल)
- वर्किंग मेमोरी: 146 (99.9वां पर्सेंटाइल)
Mensa में आम तौर पर शीर्ष 2 प्रतिशत IQ वाले लोग सदस्य बनते हैं, जबकि Intertel का चयन और भी सख्त होता है। अर्जुन महज 4 साल की उम्र में इन दोनों प्रतिष्ठित हाई-IQ सोसाइटियों के सदस्य बन गए थे।
अर्जुन की पढ़ाई और किताबों के प्रति लगाव
अर्जुन के माता-पिता के अनुसार, उन्होंने डेढ़ साल की उम्र में बच्चों की किताबों के आसान शब्द पहचानना शुरू कर दिया था। 5 साल की उम्र तक अर्जुन ने गणित, विज्ञान, खगोलशास्त्र, मानव शरीर रचना और आनुवंशिकी जैसे विषयों पर 3,000 से अधिक किताबें पढ़ ली हैं।
अर्जुन को किताबों से इतना लगाव है कि वह सफर के दौरान भी अपने साथ किताबें लेकर चलते हैं। उनका मानना है कि बोर होने से बचने के लिए कम से कम एक किताब पास होनी चाहिए।
पांच साल की उम्र में ही उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ह्यूमन फिजियोलॉजी का कोर्सवर्क पूरा कर लिया है और हार्वर्ड तथा मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के परिसरों का दौरा भी किया है।
परिवार की परवरिश और दृष्टिकोण
अर्जुन के पिता डॉ. विशाल वी. प्रजापति, जो चिकित्सक और क्लिनिकल रिसर्चर हैं, और मां महिथा थोटा, जो वकील हैं, का मानना है कि बच्चों पर कभी भी पढ़ाई या करियर का दबाव नहीं डालना चाहिए। उनका मूल मंत्र "Foster, Not Force" है, यानी बच्चे की नैसर्गिक जिज्ञासा को सही दिशा देना।
वे चाहते हैं कि अर्जुन न केवल अपनी बुद्धिमत्ता के लिए जाना जाए बल्कि एक दयालु, खुशमिजाज और विनम्र इंसान बने। परिवार का कहना है कि बच्चों की पहचान सिर्फ IQ स्कोर से नहीं की जानी चाहिए।
अर्जुन के पिता और मां की पृष्ठभूमि
डॉ. विशाल प्रजापति गुजरात के वडोदरा से हैं जबकि महिथा थोटा हैदराबाद से हैं। दोनों ने अपने बच्चे की रुचि और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हुए कभी भी उस पर दबाव नहीं डाला। उनका लक्ष्य अर्जुन को खुश, संवेदनशील और विनम्र बनाना है।
मुख्य बिंदु
- अर्जुन विशाल प्रजापति ने 141 IQ स्कोर के साथ Mensa और Intertel की सदस्यता पाई है।
- ओंटारियो विधानसभा द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है।
- 5 साल की उम्र तक उन्होंने 3,000 से अधिक किताबें पढ़ी हैं।
- अर्जुन के माता-पिता बच्चों पर दबाव न डालने और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हैं।
स्रोत: hindi.asianetnews.com


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