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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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CISCE सर्वे: 12वीं तक स्टूडेंट्स की स्कूल लाइफ से असंतुष्टि बढ़ी

CISCE और IC3 के सर्वे में 12वीं के 59% स्टूडेंट्स स्कूल लाइफ से असंतुष्ट पाए गए हैं, जबकि 8वीं के 57% स्टूडेंट्स संतुष्ट हैं।

CISCE सर्वे: 12वीं तक स्टूडेंट्स की स्कूल लाइफ से असंतुष्टि बढ़ी

एक राष्ट्रव्यापी सर्वे में सामने आया है कि प्री प्राइमरी क्लासेस में जहां स्कूल लाइफ स्टूडेंट्स को पसंद आती है, वहीं 12वीं क्लास तक पहुंचते-पहुंचते उनकी स्कूल से संतुष्टि कम हो जाती है और वे अधिक तनाव महसूस करते हैं। यह सर्वे काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) और IC3 इंस्टीट्यूट ने मिलकर किया है, जिसमें देशभर के 8,515 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया।

सर्वे के मुख्य नतीजे

इस सर्वे की रिपोर्ट 'स्टूडेंट वेल-बीइंग पल्स रिपोर्ट 2025-26' के अनुसार, 12वीं क्लास के 59 फीसदी स्टूडेंट्स अपनी स्कूल लाइफ से संतुष्ट नहीं हैं जबकि केवल 19 फीसदी स्टूडेंट्स ने उच्च संतुष्टि जताई है। इसके विपरीत, 8वीं क्लास के 57 फीसदी स्टूडेंट्स स्कूल लाइफ से संतुष्ट हैं और केवल 23 फीसदी ने कम संतुष्टि व्यक्त की है।

आत्मविश्वास और खुशी में कमी

रिपोर्ट बताती है कि जैसे-जैसे स्टूडेंट्स कक्षा में ऊपर बढ़ते हैं, उनकी मेंटल हेल्थ और सकारात्मक भावनाएं घटती हैं। कक्षा 8वीं में 62 फीसदी स्टूडेंट्स मेंटल हेल्थ को लेकर संतुष्ट हैं, जबकि कक्षा 12वीं में यह संख्या घटकर 43 फीसदी हो जाती है। अक्सर या हमेशा खुश रहने वाले स्टूडेंट्स का प्रतिशत कक्षा 8वीं में 65 फीसदी था, जो कक्षा 12वीं में घटकर 48 फीसदी रह गया। इसी तरह, आत्मविश्वास भी 64 फीसदी से घटकर 47 फीसदी हो गया।

चिंता और तनाव में वृद्धि

सर्वे में यह भी पाया गया कि कक्षा 12वीं के स्टूडेंट्स में चिंता और तनाव अधिक देखने को मिलते हैं। अक्सर या हमेशा चिंता महसूस करने वाले स्टूडेंट्स का अनुपात कक्षा 8वीं के 22 फीसदी से बढ़कर कक्षा 12वीं में 37 फीसदी हो गया। कम ऊर्जा महसूस करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी कक्षा 8वीं के 27 फीसदी से बढ़कर कक्षा 12वीं में 44 फीसदी हो गई। हालांकि, 63 फीसदी स्टूडेंट्स अपनी निजी जिंदगी से संतुष्ट हैं, जिसमें दोस्तों और परिवार के साथ रिश्ते शामिल हैं।

भावनात्मक स्वास्थ्य की समझ जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल एग्जाम के नंबर और बोर्ड के नतीजों से स्टूडेंट्स के भावनात्मक स्वास्थ्य को समझना मुश्किल है। इसलिए स्कूलों में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए बेहतर और आसानी से उपलब्ध व्यवस्थाओं की आवश्यकता है।

स्रोत: tv9hindi.com

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