सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले तेज होने के बीच तुर्की ने संकेत दिया है कि वह मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रियाद को सैन्य सहयोग दे सकता है। यह समझौता सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि मदद का दायरा जमीनी जरूरतों को देखकर तय होगा।
पिछले दो हफ्तों में हूतियों और सऊदी अरब के बीच टकराव काफी बढ़ा है। इन हमलों में सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों, हवाई अड्डों और कुछ धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया गया। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने 13 अक्टूबर को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात कर समर्थन का भरोसा दिया था।
हालांकि सेना भेजने से पहले तुर्की को संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत विदेश में सेना तैनाती का अधिकार संसद के पास है। पहले समझौते और फिर तैनाती के प्रस्ताव को संसद से साधारण बहुमत से पारित कराना होगा। फिलहाल हवाई सुरक्षा और सैन्य रसद क्षमता बढ़ाने को सबसे अहम विकल्प माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तुर्की और पाकिस्तान के इस रुख को अच्छा कदम बताया है। एर्दोगन पहले ही कह चुके हैं कि समझौता जल्द संसद के सामने रखा जाएगा, इसलिए आने वाले दिनों में अंकारा की संसदीय कार्यवाही पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।
स्रोत: बीबीसी हिंदी


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