मिलावटखोरों पर सख्ती, 3 साल में 5.18 लाख सैंपल लिए, 88 हजार से ज्यादा पर जुर्माना

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर निगरानी और कार्रवाई तेज की गई है। पिछले तीन वर्षों में लाखों नमूनों की जांच, हजारों मामलों में जुर्माना और दोष सिद्धि के जरिए इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

तीन वर्षों में जबरदस्त कार्यवाहियां

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के तहत वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कुल 5,18,559 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया गया। इस दौरान 88,192 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 3,614 मामलों में दोष सिद्ध हुए। इसके अलावा 1,161 लाइसेंस भी रद्द किए गए। दूध, घी, मसाले, शहद, पनीर समेत विभिन्न खाद्य उत्पादों की नियमित निगरानी, निरीक्षण और नमूनाकरण किया गया, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

कानून और जिम्मेदारियां तय, सख्ती से होगी कार्यवाही

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक तय करने और सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत इसके कार्यान्वयन और प्रवर्तन की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाद्य सुरक्षा आयुक्त और खाद्य सुरक्षा अधिकारी जमीनी स्तर पर कानून के पालन को सुनिश्चित करते हैं।

जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू

एफएसएसएआई ने जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है, जिसके तहत खाद्य व्यवसायों के जोखिम स्तर के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति तय की जाती है। उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में शामिल खाद्य इकाइयों का हर वर्ष निरीक्षण किया जाता है। पिछले तीन वर्षों में इस प्रणाली के तहत 56,259 निरीक्षण किए गए।

बुनियादी ढांचे को मिली मजबूती

खाद्य सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इसमें लाइसेंसिंग और पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत करना, नमूनों की जांच, उपभोक्ता शिकायत निवारण, अधिकारियों का प्रशिक्षण और प्रयोगशालाओं के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है। साथ ही “ईट राइट कैंपस” और “ईट राइट स्कूल” जैसे अभियानों के जरिए जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।

प्रयोगशालाओं और मोबाइल जांच का विस्तार

देश में खाद्य परीक्षण को मजबूत करने के लिए 252 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं और 24 रेफरल प्रयोगशालाओं को अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा, “फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स” के रूप में मोबाइल प्रयोगशालाएं भी तैनात की गई हैं, जो मौके पर ही खाद्य पदार्थों की जांच करती हैं। वर्तमान में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 ऐसी मोबाइल लैब्स काम कर रही हैं, जो मिलावट के खिलाफ त्वरित कार्रवाई में अहम भूमिका निभा रही हैं।

राज्यसभा में दी गई पूरी जानकारी

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। (इनपुट: पीआईबी)