जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। लंबे समय के प्रतिबंध के बाद प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा की है, लेकिन छात्रसंघ को 2006 में क्यों भंग किया गया था और उस समय कौन-कौन पदाधिकारी थे, यह जानना भी जरूरी है।
जामिया में छात्रसंघ चुनावों का इतिहास
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी और बाद में यह 1935-36 में ओखला के मौजूदा परिसर में स्थानांतरित हो गया। जामिया को 1988 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। यहाँ पहला छात्रसंघ चुनाव 1981 में आयोजित हुआ था, जिसमें जुबैर खान अध्यक्ष चुने गए थे। उपाध्यक्ष के रूप में रिजवान अली खानी, महासचिव के रूप में आफताब अहमद और संयुक्त सचिव के रूप में जलालुद्दीन निर्वाचित हुए थे।
छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध
जामिया में छात्रसंघ चुनाव केवल 12 साल तक चल सके। 1990 में चुनाव नहीं हुए और 1996 में छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जानकारी के अनुसार, छात्रसंघ पदाधिकारियों का विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामों में हस्तक्षेप बढ़ गया था, जैसे एडमिशन, हॉस्टल आवंटन और जांचों में दखल। इससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने लगे, जिसके कारण चुनावों पर रोक लगाई गई।
2005 में चुनाव और 2006 में भंग
1996 से रोक के बाद 2005 में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव आयोजित हुए। जुलाई 2005 में नया छात्रसंघ चुना गया, लेकिन 31 मार्च 2006 को इसे भंग कर दिया गया और चुनावों पर रोक लगा दी गई। प्रशासन ने कैंपस में हुई हिंसक घटनाओं और पढ़ाई में व्यवधान को भंग करने का कारण बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भंग करने से पहले विश्वविद्यालय दो दिन तक बंद भी रहा। 2012 में राज्यसभा में भी हिंसा के कारण भंग करने की पुष्टि हुई थी, जिसमें कुलपति पर हमला भी शामिल था।
छात्रसंघ चुनावों की वापसी और विषय संघ चुनाव
छात्रसंघ चुनावों पर रोक के बाद छात्रों ने कई बार चुनाव कराने की मांग की, लेकिन मामला अदालतों तक पहुंचा और कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। 2017 में छात्रसंघ की जगह विषय संघ चुनाव का प्रस्ताव आया, जिसके तहत विषय प्रतिनिधि चुने जाते रहे। अब प्रशासन ने 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा की है, लेकिन छात्रों का एक हिस्सा चुनाव की समयसीमा पर अभी भी अड़ा हुआ है।
अंतिम छात्रसंघ अध्यक्ष और पदाधिकारी कौन थे?
2005 में हुए अंतिम छात्रसंघ चुनाव में शम्स परवेज अध्यक्ष चुने गए थे, जो अब बिहार की पूर्णिया विश्वविद्यालय के अररिया कॉलेज में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उपाध्यक्ष के रूप में मुहम्मद फहीम हैदर खान, महासचिव के रूप में फरहत अली और संयुक्त सचिव के रूप में जिल्ले सुभानी निर्वाचित हुए थे। इनके वर्तमान कार्य के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।


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