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बुधवार, 4 नवंबर 2026
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गुजरात के सभी स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम का नया नियम लागू

गुजरात के सभी माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत और आत्महत्या रोकथाम के लिए नया नियम लागू किया गया है।

गुजरात के सभी स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम का नया नियम लागू

गुजरात में अब कक्षा 9 से 12 तक के सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत और भावनात्मक स्थिति को प्राथमिकता दी जाएगी। मानसिक तनाव, परीक्षा दबाव और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक नया नियम लागू किया है, जो गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) से जुड़े सभी स्कूलों पर लागू होगा।

गुजरात में स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974 में नए प्रावधान जोड़े हैं। इसके तहत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और आत्महत्या रोकथाम के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश बनाए गए हैं। यह कदम विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास और उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी माना गया है।

‘स्कूल वेलनेस टीम’ और ‘मनो-मित्र’ की भूमिका

हर स्कूल में अब एक ‘स्कूल वेलनेस टीम’ (SWT) बनाना अनिवार्य होगा, जिसका नेतृत्व स्कूल के प्राचार्य करेंगे। इस टीम में स्कूल काउंसलर या नियुक्त शिक्षक, कक्षा 9-12 के शिक्षक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का सदस्य, दो ‘मनो-मित्र’ (पीयर मॉनिटर) और एक गैर-शैक्षणिक कर्मचारी शामिल होंगे। टीम का काम मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या के शुरुआती संकेतों की पहचान कर विद्यार्थियों को समय पर सहायता देना होगा।

साथ ही, ‘मनो-मित्र’ के रूप में कुछ विद्यार्थियों को सहपाठियों की भावनात्मक मदद करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वे साथी विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर आवश्यक समर्थन देंगे और जरूरत होने पर काउंसलर या विशेषज्ञ से मदद दिलाएंगे। यह व्यवस्था विद्यार्थियों के बीच सहयोग और विश्वास बढ़ाने के लिए बनाई गई है।

काउंसलर नियुक्ति और अन्य सुरक्षा उपाय

100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में कम से कम एक योग्य काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नियुक्ति अनिवार्य होगी। छोटे स्कूलों को बाहरी विशेषज्ञों और स्वास्थ्य केंद्रों के साथ रेफरल व्यवस्था स्थापित करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं और कक्षा परिवर्तन के दौरान विद्यार्थियों को अतिरिक्त काउंसलिंग भी दी जाएगी।

इसके अलावा, स्कूलों में रैगिंग, बुलिंग, साइबर बुलिंग और भेदभाव के खिलाफ गोपनीय शिकायत निवारण प्रणाली भी बनानी होगी। शिकायतों की त्वरित जांच जरूरी होगी और लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस तरह स्कूलों की जिम्मेदारी केवल अच्छे अंक दिलाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों की मानसिक सुरक्षा और तनावमुक्त माहौल सुनिश्चित करना भी शामिल होगा।

स्रोत: livetimes.news

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