अलग-अलग ब्रांड के नाम से हो रही थी घी की पैकिंग, जांच के लिए नमूने लैब भेजे; सीएमएचओ टीम की रातभर चली कार्रवाई से मचा हड़कंप, राजस्थान सरस, डेयरी ब्रदर्स, श्री किरण सरस, माटुला, चॉइस डेयरी, रघु श्री और गणक सहित कई ब्रांड के पैकेट शामिल थे।
जयपुर। मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में जयपुर जिले में घी के संदिग्ध कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। सीएमएचओ की टीम ने सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए जैतपुरा स्थित घी निर्माण एवं पैकेजिंग फैक्ट्री को सीज कर दिया। फैक्ट्री से करीब 35 हजार लीटर घी का स्टॉक जब्त किया गया है। प्रारंभिक जांच में घी की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने और मिलावट की आशंका के चलते यह कार्रवाई की गई।
जयपुर सीएमएचओ फर्स्ट डॉ. रवि शेखावत के अनुसार, जैतपुरा क्षेत्र में हिमालय डेयरी प्रोडक्ट्स के नाम से संचालित फैक्ट्री में घी निर्माण और पैकेजिंग का काम किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान टीम को यहां अलग-अलग ब्रांड के नाम से पैक किया हुआ घी मिला। इनमें राजस्थान सरस, डेयरी ब्रदर्स, श्री किरण सरस, माटुला, चॉइस डेयरी, रघु श्री और गणक सहित कई ब्रांड के पैकेट शामिल थे।
छोटे पैकेट से लेकर 15 लीटर के टिन तक मिली पैकिंग
जांच टीम को फैक्ट्री में 200 एमएल, 500 एमएल, एक लीटर, दो लीटर, पांच लीटर और 15 लीटर की पैकिंग में घी मिला। इसकी पैकिंग टेट्रा पैक और टिन में की जा रही थी। इसके अलावा बड़े साइलो में भी पैकिंग के लिए घी संग्रहित किया हुआ था।
घी में फ्लेवर भी मिला, नमूने जांच के लिए भेजे
निरीक्षण के दौरान टीम को फैक्ट्री में घी का फ्लेवर भी मिला। अधिकारियों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल घी की गुणवत्ता और वास्तविक स्वरूप को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। टीम ने तैयार घी सहित संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भिजवाए हैं।
35 हजार लीटर स्टॉक जब्त, फैक्ट्री पर लगाया ताला
सीएमएचओ डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण में घी संदिग्ध प्रतीत हुआ और उसमें मिलावट की आशंका नजर आई। इसके बाद एहतियातन फैक्ट्री में मौजूद करीब 35 हजार लीटर घी का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया गया और फैक्ट्री को सीज कर दिया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है। अब प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के बाद ही घी की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मिलावट की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



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