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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
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चंबल में रिवर डॉल्फिन की नई गणना शुरू, आधुनिक तकनीक से होगा सटीक आकलन

धौलपुर के देवरी घड़ियाल केंद्र पर भारतीय वन्यजीव संस्थान ने वनकर्मियों को दिया प्रशिक्षण; फरवरी में मिली थीं 155 डॉल्फिन

चंबल में रिवर डॉल्फिन की नई गणना शुरू, आधुनिक तकनीक से होगा सटीक आकलन
चंबल नदी में पानी से बाहर झांकती रिवर डॉल्फिन (फोटो: अमर उजाला)

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में विलुप्तप्राय रिवर डॉल्फिन की गणना आधुनिक तकनीक से शुरू कर दी गई है। इस अभियान में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के वन विभागों के साथ भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञ शामिल हैं। उद्देश्य डॉल्फिन की वास्तविक संख्या के साथ उनके आवास और वितरण की सही तस्वीर सामने लाना है।

गणना से पहले तीनों राज्यों के वनकर्मियों को देवरी घड़ियाल केंद्र पर संस्थान के प्रशिक्षकों ने एक दिन का प्रशिक्षण दिया। इसमें सर्वेक्षण की आधुनिक पद्धतियों और जलीय जीवों की पहचान के तरीके बताए गए। अभयारण्य क्षेत्र के 50 से अधिक वनकर्मी प्रशिक्षित किए जा चुके हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में सर्वे दल के साथ रहेंगे।

फरवरी 2026 में हुई गणना में चंबल नदी के 435 किलोमीटर लंबे संरक्षित क्षेत्र में 155 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं। गणना दल सर्वे करते हुए अभयारण्य के अंतिम छोर, उत्तरप्रदेश के इटावा स्थित पचनदा तक जाएगा।

देश में डॉल्फिन गणना का पहला चरण 2021 से 2024 के बीच हुआ था, जिसमें 6,227 डॉल्फिन मिली थीं। इनमें 6,224 गंगा डॉल्फिन और तीन सिंधु डॉल्फिन थीं, जो पंजाब की ब्यास नदी में पाई गईं। दूसरा चरण जनवरी 2026 में शुरू हुआ और गंगा के बिजनौर से गंगासागर तक करीब 2,400 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे हो चुका है। अब चंबल और ब्रह्मपुत्र में गणना चल रही है।

स्थानीय भाषा में सूंस कहलाने वाली गंगा डॉल्फिन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का संकेत मानी जाती है, इसलिए यह सर्वे भविष्य की संरक्षण योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है।

स्रोत: अमर उजाला

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