पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में गंगा तट पर स्थित बेलूर मठ में महाषष्ठी के अवसर पर दुर्गा पूजा 2026 के अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय में यह पूजा उन्हीं परंपराओं के अनुसार हो रही है, जिन्हें स्वामी विवेकानंद ने स्थापित किया था। बताया जाता है कि यह परंपरा करीब सवा सौ साल पुरानी है।
पूजा की शुरुआत तड़के मठ के संन्यासियों की उपस्थिति में 'कल्पारंभ' अनुष्ठान से हुई। इसमें कलश की स्थापना की जाती है, जिसे देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। मुख्य पूजा से पहले देवी का आह्वान करने के लिए यह विधि संपन्न होती है। शाम को 'बोधन' समेत अन्य प्रमुख अनुष्ठान किए गए, जिन्हें देवी के जागरण और विधिवत आह्वान की रस्म माना जाता है।
इस अवसर पर श्री रामकृष्ण परमहंस, उनकी आध्यात्मिक संगिनी मां शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए गए। उत्सव की शुरुआत देखने के लिए देश-विदेश से हजारों भक्त और अनुयायी मठ परिसर में पहुंचे।
मठ के एक अधिकारी के अनुसार स्वामी विवेकानंद ने श्री रामकृष्ण के विचारों को ध्यान में रखकर यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी और आज भी इसे उसी पवित्रता के साथ मनाया जाता है। पूजा में शास्त्रीय विधानों के साथ भक्ति और सेवा की भावना को केंद्र में रखा जाता है, और देवी को अपने हृदय में स्थापित करने का संदेश दिया जाता है।
स्रोत: न्यूज18 हिंदी


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