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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
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नवरात्रि में 'छत्तीसगढ़ के मिनी कश्मीर' चैतुरगढ़ पहुंच रहे श्रद्धालु, जानें खासियत

कोरबा जिले की पहाड़ी पर स्थित किले में विराजीं बारह भुजाओं वाली मां महिषासुर मर्दिनी; 1920 से संरक्षित स्मारक

नवरात्रि में 'छत्तीसगढ़ के मिनी कश्मीर' चैतुरगढ़ पहुंच रहे श्रद्धालु, जानें खासियत
कोरबा जिले के चैतुरगढ़ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर (फोटो: न्यूज18 हिंदी)

शारदीय नवरात्रि के दौरान छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित चैतुरगढ़ का मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर श्रद्धालुओं से गुलजार है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस स्थल को उसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण 'छत्तीसगढ़ का मिनी कश्मीर' भी कहा जाता है। इसे लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है।

कोरबा जिला प्रशासन के अनुसार चैतुरगढ़ किले का निर्माण राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने कराया था। ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले की प्राकृतिक बनावट ही इसकी सुरक्षा का मुख्य आधार मानी जाती है, हालांकि कुछ हिस्सों में सुरक्षा दीवारें भी बनाई गई थीं। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग ने किले और मंदिर को संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज किया है, जिसे 17 दिसंबर 1920 को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था।

मंदिर के गर्भगृह में देवी की बारह भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचार से मुक्त किया था, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है। यह स्वरूप शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि के दिनों में यहां दूर-दराज से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आस्था के साथ-साथ इतिहास और प्रकृति का संगम होने के कारण चैतुरगढ़ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

स्रोत: न्यूज18 हिंदी

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