कानपुर प्राणि उद्यान में करीब 12 साल बाद जेब्रा का कुनबा बढ़ने की उम्मीद जगी थी, लेकिन रविवार सुबह यह खुशी मातम में बदल गई। सुबह करीब पांच बजे मादा जेब्रा ने बच्चे को जन्म दिया, जो बेहद कमजोर और दुबला-पतला था और उसकी जान नहीं बच सकी।
यह लगातार दूसरा साल है जब चिड़ियाघर में जेब्रा का नवजात नहीं बचा। पिछले वर्ष भी मादा जेब्रा के बच्चे की जन्म के कुछ देर बाद मौत हो गई थी। इस घटना ने वन्यजीवों की देखभाल और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब दो साल पहले वनतारा से जेब्रा का एक जोड़ा कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। इससे पहले बाड़े में लगभग पांच साल तक ऐश्वर्या नाम की अकेली मादा जेब्रा रही, जिसकी तीन साल पहले मौत हो गई थी। नए जोड़े के आने के बाद प्रजनन की उम्मीद बढ़ी थी और पिछले साल की घटना के बाद दोबारा मेटिंग कराई गई थी।
आरोप है कि घटना के बाद चिड़ियाघर प्रशासन इसकी जानकारी दबाए रहा। चिड़ियाघर के रेंजर फिरोज खान ने बताया कि मादा जेब्रा ने रविवार सुबह मृत बच्चे को जन्म दिया था। उन्होंने कहा कि मौत के कारणों की जांच डॉक्टरों की टीम कर रही है।
चिड़ियाघर में हाल के दिनों में वन्यजीवों की मौत के मामलों को देखते हुए विशेषज्ञ प्रजनन के दौरान बेहतर निगरानी की जरूरत बता रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला


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