कोलकाता के चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हादसे की भयावहता उजागर कर दी है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों ने पाया कि ज्यादातर पीड़ितों की मौत ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया यानी सांस रुकने, भीड़ के दबाव में छाती कुचलने से लगी चोटों और सिर की गंभीर चोटों के कारण हुई।
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और एनआरएस मेडिकल कॉलेज में हुए पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम सात लोगों की पसलियां टूट गई थीं। कई मामलों में टूटी पसलियां फेफड़ों में धंस गईं, जिससे जानलेवा अंदरूनी चोटें आईं।
बच्चों समेत कम से कम छह लोगों की मौत ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया से हुई। डॉक्टरों के अनुसार भगदड़ में छाती पर अत्यधिक दबाव से सांस और रक्त संचार रुक गया और ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई। बच्चों के शरीर पर कोई बड़ी बाहरी चोट नहीं थी, उनका दम घुट गया था। कम से कम पांच मृतकों के सिर पर गंभीर चोटें मिलीं, जिनसे दिमाग में अंदरूनी रक्तस्राव होने की आशंका है।
शनिवार शाम हुए इस हादसे में मरने वालों की संख्या 19 पहुंच गई है, जिनमें 13 महिलाएं और पांच व 13 साल के दो लड़के शामिल हैं। भीड़ प्रबंधन में कथित लापरवाही के आरोप में पूजा समिति के सदस्यों समेत सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राज्य सरकार मुआवजे का एलान कर जांच के आदेश दे चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम मेडिकल रिपोर्ट जांच का अहम आधार बनेगी।
स्रोत: टीवी9 भारतवर्ष


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।