सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की कृष्णानगर सर्किट हाउस में ठहरने से जुड़ी शिकायत का निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि सांसद को अपने दौरे से सिर्फ एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देनी होगी, जिसके बाद प्रोटोकॉल के मुताबिक उनके ठहरने का इंतजाम किया जाएगा।
इस आदेश के बाद एक सितंबर को जारी वह सर्कुलर बदल जाएगा, जिसके तहत यात्रा से कम से कम तीन-चार दिन पहले सूचना देना अनिवार्य किया गया था। मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि अगर सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना चाहती हैं तो सभी जरूरी व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
सांसद निधि (एमपीलैड्स) के कामों में कथित अड़चन की शिकायत पर अदालत ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे महुआ की शिकायतों पर ध्यान दें। साथ ही कहा कि अगर वह अधिकारियों के रवैये से संतुष्ट नहीं होतीं तो हाईकोर्ट जा सकती हैं।
महुआ ने याचिका में आरोप लगाया था कि नदिया जिला प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस से बाहर कर दिया, जबकि वहां उन्हें कमरा आवंटित हुआ था। उन्होंने 14 अगस्त की रात सोशल मीडिया पर दावा किया था कि कमरा छोड़ने से इनकार करने पर बाहर भीड़ जुट गई और नारेबाजी हुई। इस बारे में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा था। एक अक्तूबर को अदालत ने राज्य सरकार से उनकी सुरक्षा संबंधी याचिका पर जवाब मांगा था।
स्रोत: टीवी9 भारतवर्ष


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