सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भ्रष्टाचार के मामले में जमानत दे दी है। यह मामला अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए मेरिट सूची में हेरफेर के आरोपों से जुड़ा है। अदालत ने गुरुवार को जमानत देते हुए कहा कि घोष करीब दो साल से जेल में हैं और मुकदमे की प्रक्रिया धीमी है।
इससे पहले विशेष सीबीआई अदालत और कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। दिसंबर 2024 में सियालदह कोर्ट ने उन्हें रेप-मर्डर केस में जमानत दी थी, क्योंकि सीबीआई 90 दिन में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई थी, लेकिन वित्तीय गड़बड़ी वाले मामले में वह जेल में ही थे।
जमानत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि कानून भावनाओं से नहीं चलता और जमानत हर व्यक्ति का कानूनी अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संदीप घोष बेगुनाह हैं। उन्होंने माना कि अभया आंदोलन से जुड़े लोग इससे निराश हो सकते हैं।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए पूछा कि चुनाव से पहले दोषियों को सजा दिलाने का जो वादा किया गया था, उसका क्या हुआ। आरजी कर पीड़िता के पिता ने भी सीबीआई जांच की रफ्तार पर सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि नौ अगस्त 2024 को अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद पूरे राज्य में बड़े प्रदर्शन हुए थे।
स्रोत: टीवी9 भारतवर्ष


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