इधर जुर्माना लगता रहता है, सैंपल लिए जाते रहते है, उधर घटिया घी बिकते रहते

गुजरात के राजकोट में निर्मित प्रसंग घी, नन्द ग्वाला घी, राज मधुर, मिल्क बेस्ट, तस्य घी, परिवार घी, सुभाग घी,जयमूल घी, वास्तु घी सहित 9 घी ब्रांड पर कुल 40 लाख का जुर्माना लगाया

प्रतीकात्मक फोटो, जुर्माना लगाया गए घी की पेकिंग दूसरी हो सकती है ब्रांड वही है

बाड़मेर। आजकल हर कोई घी की कंपनी बनाकर अपना घी मार्केट में लॉन्च कर रहे है भले ही उस घी में गुणवत्ता हो या ना हो, भले ही उस घी को खाकर आपके स्वास्थ्य को फायदा हो या ना हो। लेकिन इन घी कंपनियों को अपना माल बेचने से मतलब है इनको आम जनता के स्वास्थ्य से कोई मतलब नहीं है सस्ता बेचने के चक्कर में जनता को घटिया घी बेचा जा रहा है इन कंपनियों के घी के सैंपल लिए जाते हैं इन पर जुर्माना लगता रहता है और कम्पनियां धड़ल्ले से अमानक स्तर का घी बेचती रहती है।

बाड़मेर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद इन कंपनियों पर लाखों रुपयों का जुर्माना लगाया गया है जिसमें मरुधर दूध डेयरी एंड किराना स्टोर से गुजरात के राजकोट में निर्मित प्रसंग घी पर अमानक स्तर का पाए जाने पर 4 लाख का जुर्माना लगाया गया है। प्रसंग घी के पहले भी विभिन्न स्थानों से सैंपल लिए गए थे और कई बार जांच रिपोर्ट में अमानक स्तर का पाया गया था और कई बार जुर्माना भी लगाया गया था लेकिन जुर्माने लगते रहते है और घटिया घी बिकता रहता है। साथ ही लक्ष्य ट्रेडिंग कंपनी से नन्द ग्वाला घी का सैंपल लिया गया था जो अमानक स्तर का पाए जाने पर ढाई लाख का जुर्माना लगाया गया है यही से राज मधुर घी पर 2 लाख 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है, महावीर सेल्स एजेंसी और कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी से मिल्क बेस्ट घी का सैंपल लिया गया था जिन पर 6 लाख एवं 5 लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया गया है, तस्य घी पर 3 लाख, मालू एंड संस से परिवार घी अमानक पाए जाने पर 4 लाख का जुर्माना लगाया गया, स्वरूप ट्रेडर्स जयमूल घी पर 4 लाख 50 हजार, खत्री किराना स्टोर से वास्तु ब्रांड घी एवं अन्य खाद्य पदार्थों पर 4 लाख 20 हजार का जुर्माना साथ ही सुनील कुमार बाबूलाल से सुभाग ब्रांड घी पर 3 लाख 75 हजार जुर्माना लगाया गया है।

इन घी कंपनियों पर पहले कई बार जुर्माना लगाया गया है लेकिन इनको जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की शायद आदत हो चुकी है बार बार अमानक पाए जाने के बाद घी कंपनियों को बैन करने की कार्यवाही करनी चाहिए।

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