नवंबर के पहले सप्ताह में भारत की कूटनीतिक गतिविधियां
नई दिल्ली, 8 नवंबर। नवंबर के पहले सप्ताह में भारत ने अपनी बहुआयामी कूटनीति को सक्रिय रखते हुए सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया। 1 से 7 नवंबर के बीच वियतनाम, अमेरिका, नेपाल और कॉमनवेल्थ देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूती मिली।
अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 1 और 2 नवंबर को वियतनाम की यात्रा की, जहां उन्होंने हनोई में सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग के साथ सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। बातचीत में कानून प्रवर्तन, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
डोभाल ने वियतनाम के कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव और राष्ट्रपति तो लाम, उपप्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग, तथा विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग से भी मुलाकात की। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक बढ़ाया है। 2027 में दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की स्थापना को 55 वर्ष पूरे होंगे। वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की गतिविधियां
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2 नवंबर को अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतों के साथ बैठक कर भारत-अमेरिका संबंधों की समीक्षा की। इसी दौरान उन्होंने एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित कॉमनवेल्थ शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
कॉमनवेल्थ बैठक में जयशंकर ने विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संपर्क मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,
“सदस्य देशों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम कम करने और उनमें विविधता लाने की दिशा में काम करना चाहिए।”
उन्होंने डिजिटल समाधान, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए आर्थिक साझेदारी की गति बढ़ाने की बात कही। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली से मुलाकात में 500 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट बढ़ाने की घोषणा की, जो सड़क, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए है। दोनों देशों ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और यूपीआई जैसी भुगतान प्रणाली के विकास में सहयोग पर सहमति जताई।
विदेश मंत्री ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भी बातचीत की। उन्होंने एंटीगुआ और बारबुडा के गवर्नर जनरल रॉडनी विलियम्स से मुलाकात कर वहां बसे भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया।
नेपाल यात्रा और द्विपक्षीय सहयोग
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 4 और 5 नवंबर को नेपाल की यात्रा की। उन्होंने नेपाल के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर द्विपक्षीय साझेदारी, विकास सहयोग और संपर्क परियोजनाओं की समीक्षा की। दोनों देशों ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत-नेपाल संबंधों में ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं प्रमुख हैं। नियमित उच्चस्तरीय संवाद इस साझेदारी को और बढ़ावा देता है।
भारत-भूटान सांस्कृतिक संबंध
1 नवंबर को भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 बौद्ध स्तूपों की स्थापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। यह सम्मान भारत-भूटान संबंधों को मजबूत करने में पीएम मोदी के योगदान के लिए दिया गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने समारोह में भारत की ओर से हिस्सा लिया।
दुनिया में दिवाली का उत्सव
नवंबर के पहले सप्ताह में विदेशों में दीपावली का उल्लास भी देखने को मिला। अमेरिका के पांच राज्यों के गवर्नरों ने आधिकारिक तौर पर दिवाली समारोह आयोजित कर भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सम्मानित किया। जापान में भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जापानी मंत्रियों और सांसदों ने भाग लिया।
न्यूयॉर्क राज्य और कनाडा के टोरंटो शहर ने 8 नवंबर को आधिकारिक दिवाली दिवस घोषित किया। टोरंटो ने नवंबर को हिंदू विरासत माह के रूप में मान्यता दी। यह भारत की सॉफ्ट पावर, प्रवासी भारतीयों के प्रभाव और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
निष्कर्ष
नवंबर के पहले सप्ताह में भारत ने सुरक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय संपर्क के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को आगे बढ़ाया। वियतनाम के साथ सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी, अमेरिका और कॉमनवेल्थ देशों के साथ व्यापारिक सहयोग, नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती तथा भूटान में सांस्कृतिक जुड़ाव इस बहुआयामी कूटनीति की प्रमुख झलक हैं। इससे भारत की वैश्विक स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूती मिली है।
स्रोत: kharinews.com


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