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सोमवार, 2 नवंबर 2026
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उमर अब्दुल्ला-निधि राजदान की शादी पर मौलाना मुफ्ती का शरीयत के खिलाफ बयान

उमर अब्दुल्ला-निधि राजदान की शादी पर मौलाना मुफ्ती ने शरीयत के खिलाफ बयान देते हुए इसे अवैध बताया है।

उमर अब्दुल्ला-निधि राजदान की शादी पर मौलाना मुफ्ती का शरीयत के खिलाफ बयान

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान की शादी की घोषणा के दो दिन बाद ही इस पर विवाद शुरू हो गया है। 'ऑल इंडिया मुस्लिम जमात' के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस शादी को इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार अवैध बताया है। उन्होंने कहा कि शरीयत के नियमों के मुताबिक इस विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती।

मौलाना मुफ्ती ने शादी को क्यों बताया अवैध?

मौलाना रजवी के मुताबिक, इस्लामी नियमों के तहत शादी तभी वैध होती है जब दोनों पक्ष मुस्लिम हों। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम हैं, जबकि निधि राजदान मुस्लिम नहीं हैं। इसी आधार पर उन्होंने इस शादी को इस्लामी नजरिए से मान्य नहीं माना।

मौलाना ने यह भी कहा कि उमर अब्दुल्ला को शादी से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि निधि राजदान इस्लाम धर्म अपना लें। यदि ऐसा होता, तो दोनों इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार निकाह कर सकते थे। चूंकि यह शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए उन्होंने इस विवाह को शरीयत के सिद्धांतों के तहत "नाजायज" करार दिया।

धार्मिक नियमों का हवाला

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने अपनी आपत्ति के समर्थन में इस्लाम में शादी से जुड़े नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उनके धार्मिक मत के अनुसार, पुरुष और महिला दोनों का मुस्लिम होना जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर उनमें से कोई एक भी मुस्लिम नहीं है, तो शादी को वैध नहीं माना जा सकता।”

मौलाना ने दोहराया कि अगर निधि राजदान ने इस्लाम अपना लिया होता और दोनों ने इस्लामी परंपराओं के अनुसार निकाह किया होता, तो विवाह को धार्मिक रूप से वैध माना जा सकता था।

शादी पर धार्मिक बहस और व्यक्तिगत स्वतंत्रता

उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी की घोषणा के बाद मौलाना रजवी की टिप्पणी ने धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है। इस मामले में एक तरफ इस्लामी सिद्धांत और धार्मिक मान्यताएं सामने आई हैं, तो दूसरी तरफ शादी और व्यक्तिगत पसंद से जुड़े अधिकारों पर भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, मौलाना रजवी का बयान उनकी अपनी व्याख्या और राय को दर्शाता है। इसे सभी धार्मिक विद्वानों की एक जैसी राय नहीं माना जा सकता।

धार्मिक फतवे और कानूनी वैधता में अंतर

इस मामले में यह समझना जरूरी है कि धार्मिक मान्यता और कानूनी वैधता अलग-अलग हैं। भारत में किसी शादी की कानूनी वैधता देश के कानूनों के आधार पर तय होती है।

मौलाना या किसी धार्मिक संगठन का बयान शादी को कानूनी रूप से अवैध नहीं बनाता। मौलाना रजवी की टिप्पणी केवल धार्मिक नजरिए से उनकी राय है। उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी की कानूनी वैधता लागू भारतीय कानूनों के आधार पर तय होगी।

इसलिए, इस शादी को लेकर उठे विवाद ने धार्मिक मान्यताओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी अधिकारों के बीच की जटिलताओं को सामने ला दिया है।

स्रोत: hindi.asianetnews.com

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