राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 10.22 करोड़ से अधिक घरों तक स्वयंसेवकों की टीमें पहुंचीं। इस दौरान संघ की शाखाएं 1.03 लाख से अधिक स्थानों पर सक्रिय हुईं और संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार हुआ। यह जानकारी हाल ही में आयोजित बैठक में साझा की गई।
शताब्दी वर्ष में हुए व्यापक आयोजन
बैठक में दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि देशभर से आमंत्रित 406 कार्यकर्ताओं में से 398 उपस्थित रहे। इस बैठक में 2025 से 2026 तक चलने वाले शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा हुई। साथ ही पंच परिवर्तन के प्रभावी क्रियान्वयन, शाखा विस्तार और संगठन की मजबूती पर भी चर्चा हुई।
गृह संपर्क अभियान से 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच
संघ के शताब्दी वर्ष के तहत चलाए गए गृह संपर्क अभियान में देश के 4,63,340 गांवों और 41,825 नगरीय बस्तियों में स्वयंसेवकों ने संपर्क किया। कुल 10,22,05,665 घरों तक संघ के कार्यकर्ता पहुंचे और हर घर में 15 से 20 मिनट तक संघ की विचारधारा और 100 वर्षों की यात्रा पर चर्चा की गई।
65,664 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन
सामाजिक समरसता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में 4,93,76,694 लोग शामिल हुए, जिनमें सवा दो करोड़ से अधिक महिलाएं भी थीं। यह कार्यक्रम 3,08,449 गांवों, 37,080 ग्रामीण मंडलों और 28,584 नगरीय बस्तियों में आयोजित हुए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे दूरदराज के इलाकों में भी सम्मेलन हुए।
संघ की शाखाएं और संगठनात्मक विस्तार
सरकार्यवाह ने कहा कि संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 99,423 हो गई है, जो 63,208 स्थानों पर संचालित हो रही हैं। पिछले वर्ष की तुलना में दैनिक शाखाओं में 12,025 और शाखा स्थानों में 8,156 की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 26,826 स्थानों पर 34,982 साप्ताहिक मिलन और 13,363 स्थानों पर 14,096 मासिक मंडलियां चल रही हैं। साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडलियों में भी क्रमशः 2,712 और 463 की वृद्धि दर्ज हुई है।
पिछले वर्ष 93,156 स्थानों पर संघ कार्यरत था, जो अब बढ़कर 1,03,397 स्थानों तक पहुंच गया है। संघ की भौगोलिक संगठनात्मक संरचना में भी बदलाव होगा, जिसमें 46 प्रांतों के बजाय 88 संभाग बनाए जाएंगे।
युवाओं और समाज के लिए कार्यक्रम
युवाओं को जोड़ने के लिए शताब्दी वर्ष में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए 21,237 स्थानों पर 57,243 कार्यक्रम हुए, जिनमें 31,26,404 विद्यार्थियों ने भाग लिया। युवा व्यवसायियों के लिए 14,285 कार्यक्रमों में 6,90,835 युवाओं ने हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 38,17,239 युवाओं ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया। जिले स्तर पर 3,207 प्रमुख जन गोष्ठियां भी आयोजित हुईं, जिनमें 4,29,262 समाजजन शामिल हुए।
सामाजिक सद्भाव और सहयोग बढ़ाने के लिए देशभर में 8,346 बैठकें हुईं, जिनमें 3,79,581 समाज प्रमुखों ने भाग लिया। इन बैठकों में 36,916 महिलाएं भी शामिल थीं।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य
सरकार्यवाह ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी दिखाई। मंदाकिनी नदी में बाढ़ के बाद चित्रकूट में 350 स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई। 6,000 से अधिक लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई और 5,600 लोगों को चिकित्सा सहायता मिली। पशुओं के टीकाकरण का भी प्रयास किया गया।
लखनऊ में बाढ़ के दौरान 300 से अधिक स्वयंसेवकों ने भोजन, पानी और दवाइयां उपलब्ध कराईं। असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक सहायता पहुंचाई। इसके लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि संग्रहीत की गई। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात प्रभावित इलाकों में भी स्वयंसेवक स्थानीय समाज के साथ राहत कार्य कर रहे हैं।
युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर जोर
बैठक में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता जताई गई। सरकार्यवाह ने कहा,
"नशीले पदार्थों से युवाओं को बचाने के लिए संघ सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करेगा।"उन्होंने प्रशासन और सरकार के साथ मिलकर नशे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और षड्यंत्र से युवाओं को बचाने की बात कही। नशे के विरुद्ध सामाजिक चेतना विकसित करने और पुनर्वास के लिए सामाजिक संगठनों के साथ काम करने की योजना पर विचार किया गया।
तीन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को याद किया गया
सरकार्यवाह ने तीन प्रमुख व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान पर वक्तव्य जारी किए। राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उनके सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों को याद किया गया। स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने पर उनकी श्रद्धांजलि दी गई। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जन्म के 100वें वर्ष पर उनके जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वावलंबन और जल संरक्षण के कार्यों को स्मरण किया गया।
सरसंघचालक के तीन देशों के दौरे
सरकार्यवाह ने बताया कि अगस्त-सितंबर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन देशों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्व और मानव एकता का संदेश दिया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं, विश्वविद्यालयों के विद्वानों और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद किया। साथ ही स्वामीनारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा और जैन मंदिर का भी दौरा किया।
सोशल मीडिया और परिवार पर सरकार्यवाह की टिप्पणी
पत्रकारों के सवालों पर दत्तात्रेय होसबाले ने सोशल मीडिया पर अनावश्यक सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक को रोकना संभव नहीं है, लेकिन सरकार को कानून बनाने में धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने परिवार में संस्कार और अनुशासन पर जोर दिया और कहा कि परिवार के सदस्य मिलकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा करें।
युवाओं की आकांक्षाओं को समझने की जरूरत
सरकार्यवाह ने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन के लिए चुनाव व्यवस्था है और अराजकता से सत्ता परिवर्तन देश के हित में नहीं। उन्होंने युवाओं के आक्रोश को सही दिशा देने और सकारात्मक कार्यों में जोड़ने पर बल दिया। समाज के अच्छे सोचने वाले लोगों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि अराजक शक्तियां हावी न हो सकें।
महिलाओं की भागीदारी पर दिया गया जोर
सरकार्यवाह ने कहा कि संघ और समाज अलग नहीं हैं। संघ का कार्य पूरे समाज को संगठित करना है। पंच परिवर्तन और सामाजिक बदलाव के कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना समाज की कल्पना संभव नहीं है। संघ का विस्तार अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के साथ केरल और पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी हो रहा है।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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