नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। कांग्रेस नेता उदित राज ने भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली पर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा दबाव में आ गई है। उन्होंने मॉक पार्लियामेंट के जरिए चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया।
मॉक पार्लियामेंट का मकसद
उदित राज ने बताया कि मॉक पार्लियामेंट का उद्देश्य देशवासियों को यह दिखाना है कि किस तरह संसद और लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। यह एक परंपरा है जिसमें थिएटर, संगीत, गीत, रैली और प्रदर्शन के माध्यम से जनता को संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और वोट चोरी की जानकारी दी जाती है।
भाजपा की रैली पर उदित राज की प्रतिक्रिया
उन्होंने कहा कि भाजपा लगभग 800 जगहों पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नाम पर कार्यक्रम कर रही है, जो बताता है कि पार्टी दबाव में है और डिफेंसिव हो गई है। उदित राज के अनुसार भाजपा की यह हरकत वोट चोरी के आरोपों से बचने की कोशिश है।
उदित राज ने यह भी कहा कि सरकारें पदयात्रा या रोड शो नहीं करतीं, उनका काम कार्य करना होता है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे किसानों की समस्याओं का समाधान करें, खाली पड़े लाखों पदों को भरें और महंगाई कम करें।
चुनाव आयोग और विपक्ष की मांग
उदित राज ने विपक्ष की उस मांग का समर्थन किया जिसमें कहा जा रहा है कि जो चुनाव आयुक्त वोट चोरी में संलिप्त है, उसे हटाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस पर काम करने के बजाय ड्रामा कर रही है ताकि उनकी बात जनता तक न पहुंचे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात जनता तक पहुंच रही है।
मेगा रैली और व्यापारियों का नुकसान
सीटीआई ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है जिसमें 1 नवंबर की मेगा रैली के कारण 20 बाजारों को 10 से 12 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान होने की बात कही गई है। इस पर उदित राज ने कहा कि वे फाइनेंस से जुड़े रहे हैं और व्यापारियों से बातचीत करते रहते हैं। उनके मुताबिक कुछ व्यापारी दबाव में हैं क्योंकि सरकारी विभागों से उन्हें परेशान किया जाता है। उदित राज ने सवाल किया कि जब जीएसटी और नोटबंदी से व्यापारी बर्बाद हो गए थे, तब वे चुप क्यों थे।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव
उदित राज ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद हो रहे छात्र संघ चुनाव को छात्रों की जीत बताया। उन्होंने एनएसयूआई के छात्रों की बहादुरी की प्रशंसा की और कहा कि प्रशासन को अनावश्यक बाधा नहीं डालनी चाहिए थी, लेकिन मजबूर होकर चुनाव कराना पड़ा।
समाचार का महत्व
उदित राज की इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि विपक्ष भाजपा की गतिविधियों और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर है। यह राजनीतिक तनाव और लोकतंत्र के प्रति चिंता को दर्शाता है, जो देश के चुनावी माहौल पर प्रभाव डाल सकता है।
स्रोत: kharinews.com


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