चुनावों के बाद ट्रंप की राजनीतिक ताकत कमजोर
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में बहुमत गंवाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासनिक शक्ति काफी कम हो गई है। आने वाले दो वर्षों में उन्हें अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना होगा। इसके साथ ही विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली कांग्रेस द्वारा उनके और उनके परिवार के व्यवसायों की कड़ी जांच की संभावना है। इसमें पाकिस्तान के साथ विवादित क्रिप्टो सौदों जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
ट्रंप के राजनीतिक विवाद और आलोचनाएं
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान जो बाइडेन को 'स्लीपी जो' कहकर लगातार उनका मजाक उड़ाया। उन्होंने बाइडेन की मानसिक और शारीरिक क्षमता पर सवाल उठाए और कई बार उनकी नकल भी की। साथ ही ट्रंप ने बाइडेन को "अमेरिकी इतिहास का सबसे भ्रष्ट और अक्षम राष्ट्रपति" भी बताया।
इसके अलावा, ट्रंप ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में विवादित दावा किया था कि बराक ओबामा का जन्म अमेरिका में नहीं बल्कि केन्या में हुआ था, इसलिए वे राष्ट्रपति बनने के योग्य नहीं थे। हालांकि बाद में उन्होंने यह दावा वापस ले लिया।
ट्रंप के सामने चार बड़ी चुनौतियां
- पारिवारिक व्यवसायों की जांच: ट्रंप के बेटों—जूनियर ट्रंप, एरिक ट्रंप और दामाद जेरेड कुशनर पर पद का दुरुपयोग कर निजी कारोबार बढ़ाने के आरोप हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से इनके रियल एस्टेट निवेशों और विदेशी निवेशकों से जुड़े सौदों की संसदीय जांच हो सकती है।
- पाकिस्तान के साथ क्रिप्टो डील: ट्रंप परिवार की 60% हिस्सेदारी वाली क्रिप्टो कंपनी 'World Liberty Financial' और पाकिस्तान के बीच विवादित करारों की जांच होनी तय है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी विदेश नीति को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया।
- पार्टी में बगावत और महाभियोग का खतरा: रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता ट्रंप के कट्टर रुख से दूरी बना रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है। डेमोक्रेट्स संसदीय जांच और महाभियोग प्रस्तावों की तैयारी कर रहे हैं।
- सरकारी कार्यों में बाधाएं: हाउस और सीनेट में बहुमत न होने से ट्रंप अपने बजट, कैबिनेट नियुक्तियों और विधेयकों को आसानी से पास नहीं करा पाएंगे। उनकी आव्रजन और आयात शुल्क नीतियों को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप के कमजोर होते तेवर और भविष्य की संभावनाएं
मध्यावधि चुनावों में हार ने ट्रंप को अमेरिकी राजनीति में कमजोर स्थिति में ला दिया है। उनके खिलाफ व्यावसायिक हितों से जुड़े आरोप, पाकिस्तान क्रिप्टो डील समेत कई विवाद आगामी दो वर्षों तक राजनीतिक संकट का कारण बने रहेंगे।
"ट्रंप की विदाई उनके तेवरों से कहीं ज्यादा बुरी हो सकती है।"
स्रोत: hindi.webdunia.com


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