नई दिल्ली : पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार के बीच विवाद बढ़ गया है। कर्नाटक सरकार ने ई20 पेट्रोल में 30% तक एथनॉल मिलने का आरोप लगाया था, जिसे पेट्रोलियम मंत्रालय ने खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि 893 नमूनों की जांच में एथनॉल की मात्रा निर्धारित 20% के अनुरूप पाई गई है।
मुख्य तथ्य
- देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 893 नमूनों की जांच हुई।
- कर्नाटक में सितंबर में लिए गए 56 नमूनों में एथनॉल की मात्रा 19-20% मिली।
- मंत्रालय ने कर्नाटक की जांच प्रक्रिया और नमूने लेने के तरीके पर सवाल उठाए।
- राहुल गांधी ने लोकसभा में कर्नाटक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
- मंत्रालय ने माइलेज और वाहन मरम्मत खर्च के दावों को भी खारिज किया।
893 नमूनों की जांच में मानक के अनुरूप एथनॉल
पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि देश के 27 राज्यों से कुल 893 ई20 पेट्रोल के नमूने लिए गए। इनमें एथनॉल की मात्रा 20% के तय मानक के मुताबिक मिली। खासकर कर्नाटक से सितंबर में लिए गए 56 नमूनों की जांच में भी 19 से 20 प्रतिशत के बीच एथनॉल पाया गया। इसके विपरीत, कर्नाटक सरकार ने एक दिन पहले 63 नमूनों में 30% से ज्यादा एथनॉल मिलने का दावा किया था।
कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल पंपों से छह-छह लीटर के नमूने लिए जाते हैं, जिनमें दो डीलर को, दो तेल कंपनी या संबंधित विभाग को और दो अधिकृत प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे जाते हैं। मंत्रालय ने कहा कि सितंबर में नमूने राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से नामित प्रयोगशालाओं को भेजे गए थे, पर अक्टूबर में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने रिटेंशन नमूने, पेट्रोल पंप के हिसाब से विवरण और प्रयोगशाला रिपोर्ट नहीं दीं। साथ ही तीसरी पार्टी की प्रयोगशालाओं के प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए।
घनत्व के आंकड़ों से भी विवाद
मंत्रालय ने कहा कि जिन नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत एथनॉल होने का दावा किया गया, उनका घनत्व 0.742 से 0.749 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर था। जबकि तेल कंपनियों के नमूनों का घनत्व 0.752 से 0.760 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर था। मंत्रालय के अनुसार, एथनॉल का घनत्व पेट्रोल से ज्यादा होता है, इसलिए अधिक एथनॉल मिलने पर घनत्व बढ़ना चाहिए। इस वजह से कर्नाटक की रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
माइलेज और मरम्मत लागत के आरोपों का खंडन
ई20 पेट्रोल से उपभोक्ताओं पर 1.01 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ के आरोपों को मंत्रालय ने ठुकराया। इस आंकड़े में 62 हजार करोड़ रुपये माइलेज नुकसान और 39 हजार करोड़ रुपये वाहन मरम्मत खर्च शामिल थे। मंत्रालय ने इंडियन ऑयल, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और अन्य अध्ययनों को आधार बताया। उन्होंने कहा कि माइलेज पर असर वाहन की श्रेणी और इंजन के अनुसार अलग-अलग होता है, कुछ वाहनों में 1-2% और कुछ में 3-6% तक हो सकता है। मंत्रालय के अनुसार, देश में 30 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 4 करोड़ चारपहिया वाहन तीन साल से ई20 ईंधन पर चल रहे हैं और बड़े पैमाने पर खराबी की कोई रिपोर्ट नहीं आई। साथ ही सरकार ने बताया कि एथनॉल मिश्रण से 97 हजार करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को लाभ मिला है।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सात जिलों के 14 में से 11 नमूनों में एथनॉल की मात्रा 20% से अधिक मिली। राहुल ने इंडियन ऑयल के नमूने में 31.2% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नमूने में 30.5% एथनॉल मिलने का जिक्र किया। उन्होंने बीपीसीएल, नायरा और शेल के नमूनों में भी निर्धारित सीमा से अधिक एथनॉल मिलने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने पूछा कि जब उपभोक्ता पेट्रोल की कीमत दे रहे हैं, तो तय सीमा से अधिक एथनॉल क्यों मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से ई20 नीति और पेट्रोल में वास्तविक एथनॉल मात्रा पर जवाब मांगा और कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी, यह जानना चाहा।
स्रोत: deshbandhu.co.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।