बस्तीवासियों की दो टूक- पहले सर्वे, मार्किंग और श्याम नगर योजना का गजट दिखाओ, फिर हो कोई कार्रवाई
पार्षद जाकिर मारवाड़ ने अधिकारियों के दौरे पर जताई आपत्ति, बिना नोटिस और सुनवाई के बेदखली नहीं करने की मांग
जोधपुर, 3 नवंबर। श्याम नगर योजना से सटी राजीव गांधी कॉलोनी में गरीब एवं कच्ची बस्ती के निवासियों को हटाने की कार्रवाई की आशंका के चलते माहौल गरमा गया है। गत 2 नवंबर को जेडीए के अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों के कथित दौरे के बाद बस्तीवासियों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र का पारदर्शी सर्वे और मार्किंग करवाई जाए तथा श्याम नगर योजना का प्रमाणित नक्शा एवं गजट नोटिफिकेशन सार्वजनिक किया जाए।
बस्तीवासियों का कहना है कि हाईकोर्ट में लंबित कंटेम्प्ट केस संख्या 1242/2024 का संबंध सड़क एवं पार्क की भूमि पर किए गए 194 अतिक्रमणों से है। उनका दावा है कि इस मामले में राजीव गांधी कॉलोनी के गरीब एवं कच्ची बस्ती के निवासियों को हटाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है।
उन्होंने डीबी स्पेशल अपील संख्या 1756/2018 में 13 मार्च 2024 को पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि समिति के सदस्यों को संरक्षण प्राप्त है। बस्तीवासियों के अनुसार, जिन 194 लोगों का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से अधिकांश समिति के वैध सदस्य हैं। ऐसे में बिना संबंधित दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों की स्पष्टता के बस्ती हटाने की बात करना उचित नहीं है।
मूल याचिका भूखंड संख्या 90 को लेकर थी : जाकिर मारवाड़
क्षेत्रीय पार्षद जाकिर मारवाड़ ने इस पूरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सूरज प्रकाश दवे की मूल याचिका भूखंड संख्या 90 से संबंधित थी, जो सड़क के दूसरी तरफ स्थित है। दोनों के बीच 70 फीट चौड़ी सड़क है।
मारवाड़ के अनुसार, सूरज प्रकाश दवे ने डीबी में स्वयं उपस्थित होकर यह स्पष्ट किया था कि वे समिति के सदस्यों को हटाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा था कि यदि जेडीए ने समिति के सदस्यों को नोटिस दिया है तो वे उसका विरोध करते हैं।
पार्षद ने सवाल उठाया कि जब मामला इस स्थिति में है तो दीपावली जैसे पवित्र त्योहार के अवसर पर गरीब परिवारों के घर उजाड़ने की आशंका क्यों पैदा की जा रही है? आखिर कौन है जो इन परिवारों को बेघर करना चाहता है?
बस्तीवासियों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
बस्ती के लोगों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
- पारदर्शी सर्वे और मार्किंग: किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र का निष्पक्ष एवं पारदर्शी सर्वे करवाकर स्पष्ट मार्किंग की जाए।
- श्याम नगर योजना का नक्शा और गजट सार्वजनिक हो: बस्तीवासियों को योजना का प्रमाणित नक्शा एवं गजट नोटिफिकेशन दिखाया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राजीव गांधी कॉलोनी वास्तव में योजना की सीमा में आती है या नहीं।
- बिना नोटिस बेदखली नहीं: किसी भी परिवार के खिलाफ बिना लिखित नोटिस, सुनवाई का अवसर और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए कोई बेदखली कार्रवाई नहीं की जाए।
लिखित आदेश दिखाए प्रशासन, मौखिक धमकियों से न फैलाए दहशत
बस्तीवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन के पास कोई वैध न्यायालयीन आदेश या कानूनी आधार है तो उसे सार्वजनिक रूप से लिखित में प्रस्तुत किया जाए। गरीब परिवारों को मौखिक निर्देशों और कार्रवाई की आशंका से भयभीत नहीं किया जाना चाहिए।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले सभी दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट की जाए, संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाए। उनका कहना है कि वे किसी भी वैध कानूनी प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन गरीब परिवारों के आशियानों पर कार्रवाई से पहले पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।



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