इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 17 नवंबर को न्यायमूर्ति अजय भनोट के अदालत कक्ष में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और वहां रखी मेज-कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया। उच्च न्यायालय ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
वकीलों का न्यायालय कक्ष में हंगामा और नारेबाजी
न्यायमूर्ति अजय भनोट के अदालत कक्ष संख्या 66 में बुधवार को वकीलों ने जमकर नारेबाजी की। कुछ वकीलों ने अदालत कक्ष में घुसकर मेज-कुर्सियाँ तोड़फोड़ दीं। इस हंगामे के कारण न्यायमूर्ति भनोट को वहां से हटना पड़ा।
अदालत ने जांच के आदेश दिए
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने अदालत के गलियारे में हुई नारेबाजी और शोर-शराबे को गंभीरता से लिया। उन्होंने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को अदालत कक्ष 66 के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर वकीलों की पहचान करने का निर्देश दिया। इस जांच रिपोर्ट को 19 नवंबर तक सौंपने को कहा गया है।
उच्च न्यायालय ने कहा है कि वकीलों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जा सकता है। साथ ही, उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा।
विरोध की वजह अधिवक्ता की गरिमा से जुड़ा विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, कुछ वकील अदालत कक्ष संख्या 49 में हुए एक घटनाक्रम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। न्यायमूर्ति देशवाल ने इस तरह के व्यवहार को न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करार दिया और कहा कि वकीलों को नारेबाजी कर अन्य अदालतों की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति भनोट के खिलाफ की शिकायत
यह घटना उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा 16 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र के एक दिन बाद हुई। पत्र में आरोप लगाया गया कि 27 अक्टूबर को न्यायमूर्ति भनोट ने एक अधिवक्ता को अपमानित किया और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. पी. श्रीवास्तव का उपहास किया।
पत्र में बताया गया कि पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी अपर शासकीय अधिवक्ता (एजीए) के पीछे की पंक्ति में बैठे थे। एक वकील ने उनसे पीछे की पंक्ति में बैठने को कहा, जिसके बाद एजीए ने वकील को फटकार लगाई और शिकायत न्यायाधीश से करने की बात कही।
बार एसोसिएशन के अनुसार, अदालत कक्ष में पहुंचने पर न्यायमूर्ति भनोट ने अधिवक्ता की ओर उंगली उठाई और कड़े शब्दों में जेल भेजने का आदेश दिया। जब अधिवक्ता ने माफी मांगी, तो न्यायाधीश ने उन्हें पुलिस अधिकारी से माफी मांगने को कहा।
साथ ही, बार एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति भनोट ने वरिष्ठ अधिवक्ता वी. पी. श्रीवास्तव का उपहास किया। उन्होंने इस व्यवहार को विधिक समुदाय की गरिमा के खिलाफ बताया और मुख्य न्यायाधीश से गंभीर कार्रवाई की मांग की।
प्रमुख तथ्य
- 17 नवंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अदालत कक्ष में वकीलों ने नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ की।
- न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने घटना की जांच के आदेश दिए और 19 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी।
- उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला भेजा जा सकता है।
- बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति अजय भनोट के व्यवहार के खिलाफ शिकायत की थी।
स्रोत: navjivanindia.com


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