नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट युद्धपोतों को बनाने के लिए 53,866 करोड़ रुपये की डील गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ सोमवार को की है।
कॉर्वेट युद्धपोतों की खासियत
कॉर्वेट छोटे आकार के तेज गति वाले युद्धपोत होते हैं, जो फ्रिगेट और विध्वंसक की तुलना में छोटे होते हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन नए कॉर्वेट्स में हाईटेक मिसाइलें, हथियार और सेंसर सिस्टम होंगे, जो उन्हें हवा, सतह और पानी के भीतर तीनों क्षेत्रों में मिशन पूरा करने में सक्षम बनाएंगे।
स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण में मील का पत्थर
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह प्रोजेक्ट भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमताओं के लिए एक अहम कदम है। इन जहाजों का डिजाइन पहली बार भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से तैयार किया जाएगा। निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया से चुने जाने के बाद होगा।
GRSE 5 कॉर्वेट बनाएगी जबकि GSL शेष तीन का निर्माण करेगी।
सरकार की रक्षा उत्पादन रणनीति
सरकार का मानना है कि यह परियोजना रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निजी शिपयार्ड और भारतीय औद्योगिक साझेदारों, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) शामिल हैं, के बीच सहयोग को मजबूत करेगी। इससे भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण इकोसिस्टम को भी बढ़ावा मिलेगा।
अक्टूबर में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इनमें से करीब 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से होने का प्रावधान है, जो देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है।


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