अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति की दो टूक—पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर में हो स्पष्ट अंतर, लेकिन वास्तविक पत्रकारों की स्वतंत्रता से समझौता नहीं
जोधपुर/ नई दिल्ली। डिजिटल दौर में हर हाथ में मोबाइल कैमरा है और हर वीडियो कुछ ही मिनटों में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। ऐसे समय में पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर की पहचान को लेकर बहस तेज हो गई है। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि पत्रकार की पहचान केवल कैमरा, माइक्रोफोन, फॉलोअर या वायरल वीडियो से नहीं, बल्कि तथ्यपरक रिपोर्टिंग, जनहित, संपादकीय जिम्मेदारी और जवाबदेही से तय होनी चाहिए।
समिति के राष्ट्रीय महासचिव शेख रईस अहमद ने कहा कि डिजिटल अभिव्यक्ति का सम्मान जरूरी है, लेकिन सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करने वाले हर व्यक्ति को पत्रकार मान लेना पत्रकारिता की पेशेवर पहचान को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों की पहचान के लिए नए मापदंड बनाए जाते हैं तो उनकी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और संवाद आधारित होनी चाहिए। सरकार, मीडिया संस्थानों और पत्रकार संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही कोई व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
«“पत्रकारिता कैमरा उठाने से शुरू नहीं होती और न फॉलोअर बढ़ने से पत्रकार की पहचान तय होती है। पत्रकारिता की असली कसौटी तथ्य, निष्पक्षता, जनहित और जवाबदेही है।”
— शेख रईस अहमद, राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति, नई दिल्ली»
फर्जी पहचान पर रोक, वास्तविक पत्रकारों को सुरक्षा
समिति ने कहा कि पत्रकारिता के नाम पर अपुष्ट खबर, भ्रामक सूचना और गलत सामग्री फैलाने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही ऐसे नियम नहीं बनने चाहिए जिनसे वास्तविक और स्वतंत्र पत्रकारों को समाचार संकलन में अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़े।
शेख रईस अहमद ने कहा कि पत्रकारों को अधिकार भी चाहिए और जवाबदेही भी। पत्रकारिता की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और खबर की विश्वसनीयता—इन तीनों के बीच संतुलन ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की मजबूती का आधार है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार की पहचान तय करते समय केवल लाइक, व्यूज और फॉलोअर नहीं, बल्कि नियमित समाचार कार्य, तथ्य-जांच, संपादकीय जवाबदेही, मीडिया संस्थान से जुड़ाव और जनहित में सक्रिय पत्रकारिता जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने साफ संदेश दिया है कि पत्रकारिता को लोकप्रियता की दौड़ नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, तथ्य और जनहित के आधार पर परखा जाना चाहिए। कैमरा हाथ में होना आसान है, लेकिन खबर के प्रति जवाबदेह होना ही असली पत्रकारिता है।



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